Natural Farming Madhya Pradesh: प्राकृतिक खेती मिशन योजना के जरिए किसानों को मुफ्त इनपुट यानी खाद-बीज, तकनीकी मदद के साथ वित्तीय छूट का लाभ दिया जा रहा है. इसके चलते तेजी से किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. मध्य प्रदेश में किसानों की रुचि प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ी है. राज्य में 2 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में किसान प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं. राज्य के सीधी जिले में इसको लेकर कृषि विभाग ने किसानों को जोड़ने के लिए पहल शुरू की है, जिसके चलते बड़ी संख्या में किसानों ने नामांकन कराया है.
दाल, ज्वार-मक्का और मोटे अनाज की खेती बढ़ी
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अनुसार सीधी जिले में कृषि विविधीकरण के तहत मोटे अनाजों और प्राकृतिक खेती को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं. जिले में बड़ी संख्या में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दालों, ज्वार, मक्का, कोदो-कुटकी और अन्य मोटे अनाजों की खेती की ओर लौट रहे हैं. इसकी वजह मोटे अनाजों को अच्छी कीमत के साथ ही बोनस दिए जाने को भी माना जा रहा है.
1000 रुपये बोनस मिलने से किसानों की रुचि बढ़ी
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से खरीफ सीजन 2025 के लिए कोदो का समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया. वहीं, कुटकी का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया. एमएसपी पर कोदो कुटकी बेचने वाले किसानों को राज्य शासन की योजना के तहत 1000 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी दी गई है. इसी तरह अन्य मोटे अनाज के लिए भी राज्य सरकार ने किसानों को बढ़ाकर भाव दिया है.
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पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है. ये अनाज ग्लूटेन मुक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी माने जाते हैं. साथ ही, कम पानी और कम रासायनिक इनपुट में उगने के कारण ये फसलें पर्यावरण और मिट्टी के अनुकूल हैं.
किसानों ने कहा अच्छा भाव मिल रहा
सीधी जिले के चौफाल कोठार गांव की प्रगतिशील महिला किसान विमलेश यादव ने कहा कि भारत सरकार की प्राकृतिक खेती मिशन योजना के तहत मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है. किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. साथ ही, सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किए जाने और राज्य सरकार की ओर से बोनस देने की घोषणा से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनका भरोसा इस खेती पद्धति पर बढ़ा है.

सीधी जिले के कृषि विभाग की सहायक संचालक गीता पटेल (ऊपर) और चौफाल कोठार गांव की प्रगतिशील महिला किसान विमलेश यादव (नीचे).
केमिकल खाद और कीटनाशक इस्तेमाल रुकने से लागत भी घटी
कृषि विभाग का कहना है कि मोटे अनाजों और प्राकृतिक खेती को अपनाने से किसानों की लागत में कमी आई है और मुनाफा बढ़ा है. कृषि विभाग की सहायक संचालक गीता पटेल ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटने से मिट्टी की उर्वरता भी सुधर रही है. इससे खेती को टिकाऊ और दीर्घकालिक लाभकारी बनाया जा रहा है. किसानों का अनुभव है कि मोटे अनाजों की खेती न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि इससे परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार हुआ है. स्थानीय स्तर पर इन अनाजों की मांग बढ़ रही है, जिससे विपणन के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.
2.74 लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती, 60 हजार किसानों ने कराया नामांकन
कृषि विभाग और प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती सीधी जिले की पहचान बन सकते हैं. यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और मिट्टी के स्वास्थ्य को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है. वर्तमान में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में 2.74 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर प्राकृतिक खेती की जा रही है. केमिकल फ्री प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए करीब 60 हजार किसान नामांकन करा चुके हैं.