Black Soldier Fly Farming : आज के दौर में जहां खेती-किसानी में लागत बढ़ती जा रही है, वहीं कुदरत के खजाने से एक ऐसा छोटा सा जीव निकलकर सामने आया है जो किसानों की किस्मत बदल सकता है. ये कोई साधारण मक्खी नहीं, बल्कि इसे ब्लैक सोल्जर फ्लाई या सैनिक मक्खी कहा जाता है. यह नन्ही सी मक्खी न केवल आपके घर और खेत के कचरे को बेशकीमती खाद में बदल देती है, बल्कि पशुपालन करने वालों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और दमदार स्रोत भी है. अगर आप मछली पालन, मुर्गी पालन या सुअर पालन करते हैं और दाने के बढ़ते दामों से परेशान हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी. आइए जानते हैं कैसे यह मक्खी किसानों के लिए ATM मशीन साबित हो रही है.
क्या है यह सैनिक मक्खी और क्यों है इतनी खास?
ब्लैक सोल्जर फ्लाई एक मध्यम आकार की मक्खी होती है, जो इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती. यह आम मक्खियों की तरह गंदगी नहीं फैलाती और न ही बीमारियां देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी भूख है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मक्खी के बच्चे अपने वजन से 5000 गुना ज्यादा कचरा खा सकते हैं. यह मूल रूप से अमेरिका में पाई जाती थी, लेकिन अब भारत के कई राज्यों में इसका पालन तेजी से बढ़ रहा है. वैज्ञानिक इसे किसानों का सबसे अच्छा लेबर मानते हैं जो बिना तनख्वाह लिए दिन-रात कचरा साफ करता है.
कचरा बनेगा काला सोना
इस मक्खी के पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके घर की बेकार सब्जियों, बचा हुआ खाना, सड़ा-गला फल और यहां तक कि गोबर को भी चंद दिनों में उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदल देती है. किसानों को बस एक टब या ट्रे में कचरा इकट्ठा करना होता है और उसमें इन इल्लियों को छोड़ देना होता है. देखते ही देखते वे सारा कचरा खा जाती हैं और जो अपशिष्ट पीछे छोड़ती हैं, वह खाद पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इस खाद का इस्तेमाल आप अपनी बागवानी, टमाटर, आलू या फूलों के पौधों में कर सकते हैं, जिससे पैदावार कई गुना बढ़ जाती है.
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पशुओं के लिए सुपरफूड-दाने का खर्चा होगा आधा
मछली और मुर्गी पालन में सबसे ज्यादा पैसा उनके खाने पर खर्च होता है. जानकारों का कहना है कि ब्लैक सोल्जर फ्लाई की इल्लियां प्रोटीन का पावरहाउस होती हैं. जब ये इल्लियां 15-20 दिन की हो जाती हैं, तो इन्हें सुखाकर मुर्गियों और मछलियों को खिलाया जा सकता है. इसे खाने से मछलियां और मुर्गियां बहुत तेजी से बढ़ती हैं और उनकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है. इससे बाजार से महंगा फीड खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे किसानों की सीधी बचत होती है.
मात्र 30 दिन का चक्र और बंपर मुनाफा
इस मक्खी का जीवन चक्र बहुत छोटा और तेज होता है. एक मादा मक्खी एक बार में लगभग 900 अंडे देती है. अंडे से इल्ली बनने और फिर उससे खाद तैयार करने का पूरा प्रोसेस मात्र 30 से 35 दिनों में पूरा हो जाता है. इसका पालन शुरू करना भी बहुत आसान है. आपको बस कुछ ट्रे और थोड़ी सी इल्लियों की जरूरत होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मात्र 5 से 10 हजार रुपये की शुरुआती लागत से कोई भी किसान या बेरोजगार युवा इस काम को छोटे स्तर पर शुरू कर सकता है और धीरे-धीरे इसे बड़े बिजनेस का रूप दे सकता है.
पर्यावरण के लिए वरदान और आसान प्रबंधन
आजकल कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है, लेकिन ब्लैक सोल्जर फ्लाई इसे वरदान बना देती है. यह जीरो वेस्ट फार्मिंग का सबसे अच्छा उदाहरण है. इसके पालन के लिए किसी बड़े तामझाम या मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती. आप पुराने प्लास्टिक के डिब्बों या घरेलू सामान का इस्तेमाल करके भी इनका पालन कर सकते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों से संपर्क करके इन इल्लियों को प्राप्त कर सकते हैं और ट्रेनिंग लेकर इस क्रांतिकारी बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं.