100 साल पहले खत्म हो चुका ये वन्य जीव फिर से लौटा, सरकार ने उठाया बड़ा कदम
मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी से वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिली है. करीब 100 साल बाद यह पहल शुरू हुई है, जिससे जंगल का संतुलन बेहतर होगा. सरकार और विशेषज्ञों की इस योजना से जैव विविधता बढ़ेगी और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.
Madhya Pradesh News: मध्यप्रदेश में जंगली भैंसे (Wild Water Buffalo) करीब 100 साल पहले अत्यधिक शिकार, आवास के नष्ट होने और बढ़ते मानव हस्तक्षेप के कारण पूरी तरह खत्म हो गए थे. अब लंबे समय बाद इनकी वापसी से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिली है. मोहन यादव ने 28 अप्रैल को बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में इस पुनर्स्थापन अभियान की शुरुआत की. ये पहल सिर्फ एक प्रजाति को वापस लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जंगल का संतुलन मजबूत होगा और जैव विविधता को भी बड़ा सहारा मिलेगा. विशेषज्ञ इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं.
काजीरंगा से कान्हा तक सुरक्षित पहुंचा पहला दल
इस परियोजना के तहत काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) से जंगली भैंसों को लाकर कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) में बसाया गया है. पहले चरण में 4 जंगली भैंसों का दल लाया गया, जिसमें 3 मादा और 1 नर शामिल हैं. इन जानवरों को विशेष सुरक्षा और निगरानी के साथ स्थानांतरित किया गया. पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम लगातार मौजूद रही, ताकि किसी भी तरह का तनाव या नुकसान न हो. सरकार की योजना के अनुसार आने वाले समय में कुल 50 जंगली भैंसों को यहां बसाया जाएगा, जिससे एक स्थायी आबादी तैयार की जा सके.
ऐतिहासिक शुरुआत से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सूपखार क्षेत्र में इन भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ा. ये दिन प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह देश में चीता पुनर्स्थापन अभियान ने नई पहचान बनाई, उसी तरह यह पहल भी राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी. इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.
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LIVE: बालाघाट जिले के सूपखार एवं टोपला क्षेत्र में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ https://t.co/kZXDtAhTtH
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 28, 2026
एमपी-असम के बीच बढ़ा वन्यजीव सहयोग
इस परियोजना के साथ मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर सहयोग और मजबूत हुआ है. आपसी समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान किया जा रहा है. योजना के अनुसार असम से गैंडे मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा. इसके बदले में मध्यप्रदेश, असम को 3 बाघ और 6 मगरमच्छ देगा. यह सहयोग न केवल प्रजातियों के संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि जैव-विविधता को भी बढ़ावा देगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम जंगलों के संतुलन को बनाए रखने में काफी प्रभावी साबित होते हैं.
जंगली भैंसों की वापसी से संरक्षण को नई दिशा
दुनिया में जंगली भैंसों (एशियाई जल भैंस) की करीब 90 फीसदी आबादी भारत में पाई जाती है, जो मुख्य रूप से असम, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में है. अब मध्यप्रदेश में भी इनकी वापसी शुरू हो गई है. कान्हा टाइगर रिजर्व में असम से 50 जंगली भैंस लाने का समझौता हुआ है, जिसकी पहली खेप 2026 में पहुंची. करीब 100 साल पहले शिकार, आवास विनाश और मानव हस्तक्षेप के कारण यह प्रजाति प्रदेश से खत्म हो गई थी. अब इस पहल से जंगल का संतुलन सुधरेगा और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक असम में करीब 1,400 से है. वहीं छत्तीसगढ़ 25 से 50 के बीच ही भैसें बची हैं.
क्यों खास है जंगली भैंसों की वापसी
मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी लगभग 100 साल पहले खत्म हो गई थी. अत्यधिक शिकार, जंगलों की कटाई और मानव हस्तक्षेप इसके मुख्य कारण रहे. आखिरी बार 1979 के आसपास कान्हा क्षेत्र में जंगली भैंस देखी गई थी. अब भारतीय वन्यजीव संस्थान की स्टडी में यह सामने आया कि कान्हा टाइगर रिजर्व इस प्रजाति के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां घास के विस्तृत मैदान, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानवीय हस्तक्षेप मौजूद है. जंगली भैंसों की वापसी से न केवल इस प्रजाति का संरक्षण होगा, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी, जिससे अन्य वन्यजीवों को भी फायदा पहुंचेगा.