युवाओं के खेती में आने से तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इससे कृषि लागत घटाने में मदद मिल रही है और उत्पादन ज्यादा हासिल हो पा रहा है. जबकि, कीट-बीमारी लगने का खतरा घटने से उपज क्वालिटी भी बेहतर मिल रही है. उत्तराखंड के युवा किसान धीरज धपोला आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं और उन्होंने सब्जी फसलों के लिए मल्चिंग विधि का इस्तेमाल करके अपनी कृषि लागत घटाने और उत्पादन को दोगुना से ज्यादा करने में कामयाबी हासिल की है.
युवा किसान ने खेती में अपनाई मल्चिंग विधि
उत्तराखंड सरकार के उद्यान विभाग के अनुसार बागेश्वर जिले के गांव तुनेड़ा के तोक उड़ेरा निवासी प्रगतिशील किसान धीरज धपोला स्थानीय किसानों के लिए मिसाल बने हैं. धीरज ने बागवानी, सब्जी और नकदी फसलों को मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया है. अपनी मेहनत, प्रगतिशील सोच और कृषि तकनीकों का उपयोग करने उन्होंने खेती के माध्यम से रोजगार और ज्यादा कमाई हासिल की है.
लागत घटने और उत्पादन बढ़ने का दावा
प्रगतिशील किसान धीरज धपोला ने मीडिया को बताया कि वह अपने 7 नाली खेत में मल्चिंग शीट तकनीक अपनाकर टमाटर, शिमला मिर्च, मिर्च, ककड़ी तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती कर रहे हैं. मल्चिंग तकनीक से उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण में भी मदद मिली है. इससे कृषि लागत घटी और और पहले की तुलना में ज्यादा उत्पादन के साथ ही बेहतर उपज क्वालिटी भी मिल रही है.
कोरोना में छोड़ी थी नौकरी और शुरू की खेती
युवा किसान धीरज ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान बागेश्वर शहर की नौकरी छोड़ने के बाद वह गांव लौट गए और वहीं पर उन्होंने खेती को आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया. इस दौरान उद्यान विभाग से उन्होंने संपर्क किया और वहां से उन्हें आधुनिक विधियों के जरिए खेती की ट्रेनिंग मिली. धीरज ने बताया कि उन्हें उन्नत बीज, दवाइयां, कृषि यंत्र और मल्चिंग शीट भी उद्यान विभाग की मदद से मिली. इससे खेती को आधुनिक तरीके से करने में सहायता मिली.

युवा किसान धीरज धपोला और उद्यान विभाग के सहायक विकास अधिकारी शैलेश तिवारी.
आधुनिक तकनीकें खेती लागत घटा रहीं – सहायक विकास अधिकारी
उद्यान विभाग के सहायक विकास अधिकारी शैलेश तिवारी ने मीडिया को बताया युवा किसान धीरज आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हैं. उन्होंने कहा कि मल्चिंग शीट जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल सकते हैं. उन्होंने कहा कि मल्चिंग विधि से खरपतवार की समस्या दूर होती है और मिट्टी की नमी ज्यादा वक्त तक रही है. इससे फसल में कीट-बीमारी लगने का खतरा कम होता है, जिससे कृषि लागत घटती और ज्यादा उत्पादन बेहतर क्वालिटी के साथ मिलता है.