जी-9 केला की खेती का कमाल.. पथरीली जमीन उगल रही सोना, प्रति एकड़ 3 लाख प्रॉफिट बना रहे कैलाश पवार

कैलाश पवार अब अपनी पथरीली जमीन पर केला की उन्नत किस्म G-9 की खेती कर रहे हैं और प्रति एकड़ तीन लाख रुपये का प्रॉफिट हासिल कर पा रहे हैं. उन्होंने भुताई गांव में नवाचार से केला की खेती करके कृषि में मिसाल पेश की है. वह लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में केले की उन्नत किस्म जी-9 की मुनाफेदार खेती कर रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 6 Feb, 2026 | 06:30 PM

उन्नत किस्मों के आने से किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है और लागत में कमी देखी जा रही है. इसके साथ ही पथरीली और खराब जमीन पर भी फसल उगाना आसान हो गया है. मध्य प्रदेश के किसान कैलाश पवार ने पथरीली और खराब जमीन पर खेती करने का फैसला किया और केला की उन्नत किस्म जी-9 को लगाया. यह केला किस्म की खेती उनके लिए जैकपॉट साबित हो रही है और वह प्रति एकड़ 3 लाख रुपये तक का प्रॉफिट हासिल कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड के गांव भुताई में किसान कैलाश पवार ने पथरीली जमीन पर मुनाफे वाला खेती मॉडल विकसित कर कामयाबी हासिल की है. किसान कैलाश ने कहा कि उन्हें अपनी पथरीली जमीन पर सामान्य फसलों जैसे धान और गेहूं की खेती करने से नुकसान हो रहा था, जमीन में कंकड़ पत्थर होने की वजह से उत्पादन कम होता था और लागत ज्यादा आती थी. इसका हल उन्होंने केला की खेती के रूप में खोज निकाला.

जी-9 केला की खेती से प्रति एकड़ 3 लाख रुपये मुनाफा

कैलाश पवार अब अपनी पथरीली जमीन पर केला की उन्नत किस्म G-9 की खेती कर रहे हैं और प्रति एकड़ तीन लाख रुपये का प्रॉफिट हासिल कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भुताई गांव में नवाचार के माध्यम से केला की खेती करके कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है. वह लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में केले की उन्नत किस्म जी-9 की मुनाफेदार खेती करने में सफलता हासिल की है.

कैलाश के खेत से फसल ले जाने के लिए पहुंच रहे व्यापारी

कैलाश पवार ने कहा कि बीते साल उन्होंने अप्रैल माह में पुणे से केला की जी-9 किस्म के पौधे मंगवाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ रोपण किया था, जो मात्र लगभग 11 माह में पूरी तरह तैयार हो गई है. उन्होंने कहा कि कि 15 फरवरी के बाद मार्च माह तक पूरी फसल की कटाई हो जाएगी और प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक लाभ होने की संभावना है. फसल की गुणवत्ता को देखते हुए जबलपुर एवं नागपुर के व्यापारियों ने खेत पर पहुंचकर निरीक्षण किया है और वे सीधे खेत से ही उपज खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं.

किसान कैलाश ने केला के अलावा स्ट्रॉबेरी की खेती भी कर रखी है.

कृषि विभाग की टीम ने खेती मॉडल देखा और सराहा

विशेष बात यह है कि यह केला पथरीली एवं मुरम वाली उस भूमि पर उगाया गया है, जहां सामान्यतः अन्य फसलें लेना संभव नहीं माना जाता. कृषि विभाग की टीम ने भी खेत पर पहुंचकर इस नवाचार का अवलोकन किया और किसान की ओर से अपनाई गई तकनीकों की सराहना की. कृषि विभाग ने किसान के खेती मॉडल को देखा और तारीफ की. खेती संबंधी जरूरतें पूरी करने और नई तकनीकों के जरिए खेती करने के लिए प्रेरित किया है.

6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की, 15 फरवरी के बाद बाजार में शुरू हो जाएगी बिक्री

किसान कैलाश पवार पूर्व से ही नवाचारी रहे हैं. उन्होंने पिछले वर्ष लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छा लाभ अर्जित किया था. वर्तमान वर्ष में भी उन्होंने 6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी, एक एकड़ में ब्लूबेरी तथा एक एकड़ में गोल्डन बेरी की खेती की है, जिसकी उपज 15 फरवरी के बाद बाजार में आने की संभावना है. कैलाश पवार की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह संदेश देती है कि नवाचार, तकनीक और मेहनत के साथ कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है.

Published: 6 Feb, 2026 | 06:27 PM

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