2 लाख रुपये लोन से बनाई कंपनी.. आज 33 करोड़ का टर्नओवर, किसान यूज कर रहे मल्चिंग शीट

Maharashtra Arun Awatade Success Story: अरुण ने किसान इंडिया को बताया कि उनकी मल्चिंग शीट टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने में मददगार हैं और खेत में नमी रखकर मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारती हैं. इसके साथ ही मल्चिंग से किसानों को 60 से 70 फीसदी तक पानी बचाने में मदद मिलती है. उनकी कंपनी का टर्नओवर 33 करोड़ के पार पहुंच गया है.

नोएडा | Updated On: 22 Apr, 2026 | 01:54 PM

किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों में शामिल मल्चिंग विधि के लिए जरूरी मल्चिंग शीट (प्लास्टिक पन्नी) का प्रोडक्शन कर रहे महाराष्ट्र के अरुण अतावड़े ने अपनी कंपनी को 33 करोड़ के टर्नओवर कैटेगरी में शामिल कर दिया है. अरुण अतावड़े ने किसान इंडिया को बताया कि उन्होंने 2 लाख रुपये का लोन लेकर उद्यमी बनने की शुरुआत की थी और उन्हें कृषि क्षेत्र में रहना था, इसलिए उन्होंने कई कलर और कोटिंग वाली मल्चिंग शीट का प्रोडक्शन शुरू किया. वह महाराष्ट्र के अलावा देशभर में इन मल्चिंग शीट को किसानों तक पहुंचाते हैं. उनकी कंपनी आइरिस ग्रुप में 265 लोगों को वह जॉब दे रहे हैं और इनडायरेक्ट तरीके से रोजगार हासिल करने वालों की संख्या काफी ज्यादा है.

महाराष्ट्र के शोलापुर जिले दूरदराज में सूखा प्रभावित गांव में अरुण आवताडे का जन्म हुआ था. उन्होंने किसान इंडिया को बताया कि वह दो भाइयों में सबसे बड़े हैं. 1970 के दशक में पड़े भीषण सूखे के कारण लोग पलायन करने लगे. इसी क्रम में अरुण के माता-पिता पुणे चले गए. पुणे में अरुण ने भूमिहीन मजदूरों और किसानों की दयनीय स्थिति और संघर्षों को करीब से देखा था. इसी कारण उनमें हमेशा स्थायी बदलाव लाने की तीव्र इच्छा रही. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ प्राइवेट जगहों पर काम किए व्यवसाय शुरू करने के रास्ते तलाशते रहे. वह कृषि और जल संरक्षण की दिशा में ही काम करना चाहते थे.

2 लाख रुपये लोन लेकर कारोबार की शुरुआत

काफी शोध के बाद उन्हें पता चला कि मल्चिंग तकनीक उनके प्रश्न का उत्तर बन सकती है. मल्चिंग पानी बचाने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, कीटनाशकों के उपयोग को रोकने, मज़दूरी लागत घटाने और मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है. 2010 में उन्होंने मात्र 40,000 रुपये के छोटे निवेश से पुनर्निर्मित कबाड़ मशीनरी के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया और अपने बचपन के मित्र गणेश को मदद के लिए साथ लिया. लेकिन वे इसे लंबे समय तक चलाए नहीं रख सके. इस दौरान वह 2012 में भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (BYST) के संपर्क में आए. BYST की मदद से अनुभवी खाद्य एवं रेस्तरां व्यवसायी सुभाष शेजवाल को अरुण के मेंटोर बने और उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा से 2 लाख रुपये का लोन दिलवाने में मदद की. इस रकम के साथ ही उन्होंने मल्चिंग के कारोबार में कदम रख दिए. लेकिन, ज्यादा रकम की जरूरत पड़ी तो उन्हें 75 लाख रुपये का टर्म लोन और 25 लाख रुपये की कैश क्रेडिट भी मिली.

मल्चिंग शीट बनाकर 33 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी

आज पुणे स्थित उनकी कंपनी आइरिस ग्रुप मल्चिंग फिल्म (मल्चिंग प्लास्टिक शीट ) और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग उत्पाद बनाने वाली अग्रणी कंपनियों में से शामिल है. BYST से मिली जानकारी और अनुभव के आधार पर अरुण ने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए सिल्वर ब्लैक, लाइट ब्लैक, येलो ब्लैक, व्हाइट ब्लैक और रेड ब्लैक सहित विभिन्न प्रकार की मल्चिंग शीट बनानी शुरू की हैं. वर्तमान में आइरिस ग्रुप महाराष्ट्र सहित तीन अन्य राज्यों में कार्यरत है और किसानों तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है. कंपनी में 265 लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं. आज उनकी कंपनी का टर्नओवर FY25-26 के लिए 33.84 करोड़ रुपये रहा है.

कलरफुल फसल मल्चिंग शीट और अरुण अवताडे.

मल्चिंग शीट 70 फीसदी पानी खपत बचाने में मददगार

अरुण ने बताया कि उनकी मल्चिंग शीट कृषि का एक टिकाऊ मॉडल विकसित करने में मदद करता है. मल्चिंग तकनीक से खेत में नमी बनाए रखकर और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारकर किसानों को 60 से 70 फीसदी तक पानी बचाने में मदद करता है. सरकार किसानों को इन मल्चिंग शीट के लिए 50 फीसदी सब्सिडी भी देती है. मल्चिंग शीट के इस्तेमाल से किसान पानी बचाते हैं, जिससे विद्युत चालित ट्यूबवेलों से भूमिगत पानी निकालने में बिजली खपत काफी घट जाती है. खेतों में अंधाधुंध कीटनाशकों के छिड़काव, खरपतवार और कीट नियंत्रण, तथा निराई-गुड़ाई के लिए बड़े पैमाने पर श्रम की जरूरत बहुत कम हो गई है. लागत में कमी और उपज में सुधार के साथ किसानों की आय और जीवनस्तर में सुधार हुआ है.

Published: 22 Apr, 2026 | 01:45 PM

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