Basmati Export: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद बासमती चावल और चाय के कारोबार से जुड़े किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. यह समुद्री मार्ग भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है. यदि यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशों में आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है.
बासमती कारोबार पर बढ़ा दबाव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में पश्चिम एशिया से मांग बढ़ने के कारण बासमती चावल की कीमतों में अच्छा उछाल देखा गया था. निर्यातकों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी भी की थी, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक संकट ने बाजार का माहौल बदल दिया है. व्यापार जगत को आशंका है कि यदि खाड़ी देशों में निर्यात बाधित हुआ तो घरेलू बाजार में बासमती की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनेगा. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों की आय प्रभावित हो सकती है.
खाड़ी देश हैं सबसे बड़े खरीदार
भारत दुनिया के सबसे बड़े बासमती निर्यातकों में शामिल है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में भेजा जाता है. सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देश भारतीय बासमती के प्रमुख खरीदार हैं. यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की व्यापारिक रुकावट सीधे भारतीय निर्यात पर असर डालती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले महीनों में निर्यात के आंकड़ों पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है.
चाय उद्योग के सामने भी चुनौती
बासमती के साथ-साथ भारतीय चाय उद्योग भी इस संकट से प्रभावित हो सकता है. पश्चिम एशिया भारतीय चाय का एक बड़ा बाजार है, जहां खासतौर पर प्रीमियम गुणवत्ता वाली चाय की अच्छी मांग रहती है. हर वर्ष इस अवधि में बड़ी मात्रा में चाय की खेप विदेश भेजी जाती है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है. कई व्यापारियों का कहना है कि अनिश्चितता बढ़ने से नए ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं.
बढ़ता मालभाड़ा और भविष्य की चिंता
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री मार्गों में व्यवधान और मालभाड़े की बढ़ती लागत ने निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. यदि परिवहन खर्च लगातार बढ़ता रहा तो भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में महंगे हो सकते हैं. ऐसे में किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका है. फिलहाल सभी की निगाहें पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हैं, क्योंकि वहां का हर घटनाक्रम भारत के कृषि निर्यात और किसानों की आय पर सीधा असर डाल सकता है.