11 साल, 11 गणतंत्र दिवस… देखें 2015 से 2025 तक का सफर, जब हर 26 जनवरी ने बढ़ाया देश का हौसला

77th Republic Day: 26 जनवरी की सुबह कुछ अलग होती है. सड़कों पर तिरंगे लहराते हैं, दूर-दूर तक देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और हर दिल में बस एक ही एहसास होता है ‘हम भारतीय हैं’. 2015 से 2025 तक जब-जब गणतंत्र दिवस की परेड हुई, तब-तब देश ने सिर्फ झांकियां नहीं देखीं, बल्कि अपने हौसले, अपनी ताकत और अपने भविष्य की झलक भी देखी.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 26 Jan, 2026 | 09:29 AM
1 / 62015, जब गणतंत्र दिवस ने बदला अंदाज: 2015 से गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक रस्म नहीं रही. पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में परेड एक ऐसे मंच में बदल गई, जहां से सरकार ने देश को अपने सपने और सोच साफ-साफ दिखानी शुरू की.

2015, जब गणतंत्र दिवस ने बदला अंदाज: 2015 से गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक रस्म नहीं रही. पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में परेड एक ऐसे मंच में बदल गई, जहां से सरकार ने देश को अपने सपने और सोच साफ-साफ दिखानी शुरू की.

2 / 6परेड में दिखने लगा सरकार का रोडमैप: 2016 से 2019 तक परेड में जो झांकियां दिखीं, वही देश की चर्चा बन गईं—कभी स्वच्छ भारत, कभी मेक इन इंडिया, तो कभी डिजिटल इंडिया. लोगों को समझ आने लगा कि सरकार किस दिशा में चल रही है.

परेड में दिखने लगा सरकार का रोडमैप: 2016 से 2019 तक परेड में जो झांकियां दिखीं, वही देश की चर्चा बन गईं—कभी स्वच्छ भारत, कभी मेक इन इंडिया, तो कभी डिजिटल इंडिया. लोगों को समझ आने लगा कि सरकार किस दिशा में चल रही है.

3 / 6कोरोना में भी नहीं झुका गणतंत्र दिवस: 2020 और 2021 देश के लिए सबसे मुश्किल साल रहे. तब भी गणतंत्र दिवस मनाया गया. कम भीड़, सादगी, लेकिन हौसला पूरा—यह बताने के लिए कि देश हालात से हार नहीं मानता.

कोरोना में भी नहीं झुका गणतंत्र दिवस: 2020 और 2021 देश के लिए सबसे मुश्किल साल रहे. तब भी गणतंत्र दिवस मनाया गया. कम भीड़, सादगी, लेकिन हौसला पूरा—यह बताने के लिए कि देश हालात से हार नहीं मानता.

4 / 6राजपथ नहीं, अब कर्तव्य पथ: 2022 में एक बड़ा बदलाव हुआ. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया. संदेश साफ था—अब आज़ादी सिर्फ अधिकारों की नहीं, जिम्मेदारियों की भी है, और यही नई सोच परेड में दिखी.

राजपथ नहीं, अब कर्तव्य पथ: 2022 में एक बड़ा बदलाव हुआ. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया. संदेश साफ था—अब आज़ादी सिर्फ अधिकारों की नहीं, जिम्मेदारियों की भी है, और यही नई सोच परेड में दिखी.

5 / 6जब नारी शक्ति बनी परेड की शान: 2023 और 2024 में महिलाओं की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा. सेना से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक महिलाओं ने दिखाया कि देश आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका कितनी मजबूत है.

जब नारी शक्ति बनी परेड की शान: 2023 और 2024 में महिलाओं की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा. सेना से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक महिलाओं ने दिखाया कि देश आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका कितनी मजबूत है.

6 / 62025 तक का सफर: 2015 से 2025 तक पीएम मोदी की लगातार मौजूदगी ने एक बात साफ कर दी-देश में नेतृत्व बदला नहीं, बल्कि मजबूत हुआ. यही वजह है कि हर साल की परेड लोगों के लिए सिर्फ देखने का नहीं, भरोसा महसूस करने का मौका बनी.

2025 तक का सफर: 2015 से 2025 तक पीएम मोदी की लगातार मौजूदगी ने एक बात साफ कर दी-देश में नेतृत्व बदला नहीं, बल्कि मजबूत हुआ. यही वजह है कि हर साल की परेड लोगों के लिए सिर्फ देखने का नहीं, भरोसा महसूस करने का मौका बनी.

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