आंध्र प्रदेश में बेमौसम बारिश से धान-मक्का और बागवानी फसलें चौपट, सरकार ने दिए तुरंत सर्वे के निर्देश
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि फसल नुकसान का सही और विस्तृत आकलन किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके.
आंध्र प्रदेश में इन दिनों मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है और इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर देखने को मिल रहा है. बेमौसम बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है. रिपोर्ट के अनुसार करीब 1,215 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं. ऐसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत सतर्कता बरतने की सलाह दी है और अधिकारियों को नुकसान का सही आकलन करने के निर्देश दिए हैं.
कई जिलों में तबाही जैसे हालात
मौसम के इस बदलाव का असर राज्य के कई हिस्सों में साफ नजर आ रहा है. कृष्णा, नेल्लोर, श्री सत्य साई, एनटीआर, अनंतपुर और पर्वतीपुरम मन्यम जैसे जिलों में हालात ज्यादा खराब हैं. इन इलाकों के 16 मंडलों और 89 गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा है. तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने कई खेतों में खड़ी फसलों को गिरा दिया, जिससे फसल पूरी तरह खराब हो गई.
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 1,215 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं और इससे 2,043 किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है. हालांकि जमीनी स्तर पर नुकसान इससे भी ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है.
धान और मक्का पर सबसे ज्यादा असर
इस बेमौसम बारिश ने खासकर मुख्य फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. धान, जो किसानों की प्रमुख फसल है, करीब 384 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रभावित हुआ है. वहीं मक्का की फसल को लगभग 630 हेक्टेयर में नुकसान हुआ है. इसके अलावा काली दाल की फसल भी करीब 200 हेक्टेयर में खराब हो गई है.
ये वही फसलें हैं, जिन पर हजारों किसान अपनी आय के लिए निर्भर रहते हैं. ऐसे में नुकसान का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है.
बागवानी फसलों को भी भारी झटका
सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि बागवानी फसलें भी इस मौसम की मार से बच नहीं पाईं. अनंतपुर, श्री सत्य साई और एनटीआर जिलों में करीब 267 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलें खराब हुई हैं, जिससे 307 किसान प्रभावित हुए हैं.
केला, पपीता, आम और संतरा जैसी फसलें तेज हवाओं और बारिश के कारण काफी नुकसान झेल रही हैं. इन फसलों में लागत ज्यादा होती है, इसलिए नुकसान होने पर किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लगता है.
सरकार सक्रिय, राहत की तैयारी तेज
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि फसल नुकसान का सही और विस्तृत आकलन किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को लगातार मौसम की जानकारी दी जाए, ताकि वे आगे होने वाले नुकसान से बचाव कर सकें. उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं.
आगे भी मौसम खराब रहने के संकेत
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन से चार दिनों तक हालात ऐसे ही बने रह सकते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री किंजारापु अच्चन्नायडु ने भी अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और तैयारी की समीक्षा की.
बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम राज्य के कई हिस्सों में और असर डाल सकता है, खासकर रायलसीमा और तटीय इलाकों में. ऐसे में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
किसानों के लिए जरूरी सलाह
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि जो फसल तैयार हो चुकी है, उसे जल्द काटकर सुरक्षित जगह पर रख लें. खराब मौसम के दौरान खेतों में जाने से बचें और बिजली कड़कने के समय खुले में न रहें. खेती से जुड़े उपकरणों को भी सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है.
चुनौती का समय, लेकिन उम्मीद भी कायम
हालांकि यह बारिश गर्मी से राहत जरूर दे रही है, लेकिन किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है. कई किसानों के सामने अब फिर से नई शुरुआत की चुनौती है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हर प्रभावित किसान को मदद दी जाएगी, लेकिन इस मुश्किल समय में सतर्कता और सही फैसले ही किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित होंगे.