असम में फिर खिला कमल, हिमंता की आंधी में कांग्रेस चीफ गोगोई अपनी सीट भी नहीं बचा पाए

असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में बीजेपी नेतृत्व वाला एनडीए बड़ी बढ़त बनाता नजर आ रहा है. हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं. विकास, हिंदुत्व और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी को कई अहम सीटों पर मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है.

नोएडा | Updated On: 4 May, 2026 | 03:30 PM

Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना शुरू होते ही राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आने लगी है. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन बड़ी बढ़त बनाता दिखाई दे रहा है. चुनाव आयोग ने सुबह 8 बजे से सभी 126 सीटों पर मतगणना शुरू की. ताजा रुझानों के अनुसार एनडीए 90 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन काफी पीछे दिखाई दे रहा है. वहीं, प्रदेश कांग्रेस प्रमुख गोरव गोगोई अपनी सीट 23 हजार वोटों से हार गए हैं.

इन रुझानों के बीच यह लगभग तय माना जा रहा है कि हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बन सकते हैं. इस बार चुनाव में 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ, जिसे लेकर माना जा रहा है कि जनता ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से भी ज्यादा दर्ज की गई.

विकास और पहचान की राजनीति बना बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार

इस चुनाव में हिमंता बिस्वा सरमा  ने विकास और क्षेत्रीय पहचान दोनों मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जाति, माटी और भेटी यानी असम की पहचान, जमीन और संस्कृति की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. उन्होंने बार-बार कहा कि असम की स्वदेशी पहचान को बचाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है. इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ और जनसंख्या बदलाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. खासतौर पर बंगाली भाषी मुस्लिम आबादी को लेकर दिए गए उनके बयानों ने चुनाव में ध्रुवीकरण का माहौल भी बनाया. सरमा ने साफ कहा कि बीजेपी को असमिया मुसलमानों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन मिया मुसलमानों के वोट की उन्हें उम्मीद नहीं है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हिंदुत्व और क्षेत्रीय अस्मिता का यह मिश्रण बीजेपी के लिए काफी असरदार साबित हुआ. इसका फायदा पार्टी को ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में मिलता दिखाई दे रहा है.

विकास कार्यों और योजनाओं को जनता के सामने रखा

चुनाव प्रचार में बीजेपी  ने केवल पहचान की राजनीति ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों को भी जोर-शोर से जनता के सामने रखा. हिमंता सरमा ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में असम में रिकॉर्ड विकास हुआ है. उन्होंने राज्य में बने 1,330 पुलों, नई सड़क परियोजनाओं और बेहतर कनेक्टिविटी को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया. इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान गुवाहाटी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को भी चुनावी मुद्दा बनाया गया. महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सरमा ने खुद को मामा की छवि में पेश किया. अरुणोदय जैसी योजनाओं के जरिए गरीब और महिला मतदाताओं तक सीधा जुड़ाव बनाने की कोशिश की गई. बीजेपी का दावा है कि इन योजनाओं का असर गांवों और गरीब परिवारों में साफ दिखाई दिया. यही वजह है कि पार्टी को इस बार पहले से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबला, विपक्ष को झटका

इस चुनाव में कई सीटों पर बेहद दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले. जोरहाट सीट पर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई बीजेपी उम्मीदवार से पीछे चलते नजर आए. वहीं गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता और एजेपी की युवा उम्मीदवार कुंकी चौधरी के बीच मुकाबला चर्चा में बना रहा. दिसपुर सीट पर भी मुकाबला काफी दिलचस्प रहा, जहां कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए प्रद्युत बोरदोलोई चुनाव मैदान में उतरे.

दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन  को उम्मीद थी कि चाय बागान क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में उन्हें फायदा मिलेगा, लेकिन शुरुआती रुझानों में ऐसा होता नजर नहीं आया. एग्जिट पोल में भी एनडीए को बड़ी बढ़त दिखाई गई थी. कई एजेंसियों ने बीजेपी गठबंधन को 80 से 100 सीटों तक मिलने का अनुमान जताया था. अब शुरुआती रुझान भी लगभग उसी दिशा में जाते दिख रहे हैं. फिलहाल असम में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल बनने लगा है. अगर यही रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभालेंगे और बीजेपी पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ और मजबूत कर लेगी.

Published: 4 May, 2026 | 03:28 PM

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