9 गांवों की जमीन अधिग्रहण मामले ने तूल पकड़ा, 499 एकड़ उपजाऊ भूमि नहीं देना चाहते किसान

विपक्षी दल जेडीएस के किसानों के साथ पैदल मार्च निकालने और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मामले पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि हम पिछली सरकारों के फैसलों को ही आगे बढ़ा रहे हैं. विपक्ष विवाद खड़ा करने और किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 21 Jun, 2026 | 05:44 PM

कर्नाटक जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर किसानों के साथ जनता दल सेक्यूलर (JDS) ने पैदल मार्च निकाला. ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) प्रोजेक्ट के लिए लगभग 500 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचना जारी किए जाने के बाद से किसान इसका विरोध कर रहे हैं. किसानों के संगठन कर्नाटक राज्य रैयत संघ ने कहा है कि सरकार किसानों की उपजाऊ जमीन जबरदस्ती ले रही है. इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर उनका संगठन लड़ाई लड़ेगा. किसानों के समर्थन में विपक्षी दल जेडीएस और भाजपा के उतरने से राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है.

मामले पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि हम पिछली सरकारों के फैसलों को ही आगे बढ़ा रहे हैं. विपक्ष विवाद खड़ा करने और किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.

कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी के पास प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना के लिए लगभग 500 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित अंतिम अधिसूचना जारी कर दी है. इसके तहत जीबीआईटी परियोजना के लिए रामनगर और हरोहल्ली तालुकों के तीन गांवों में स्थित 499 एकड़ भूमि के अधिग्रहण किया जाना है. लेकिन, इन गांवों के किसान इसका विरोध कर रहे हैं और अपनी जमीन देने से इनकार किया है.

जेडीएस और किसानों का पैदल मार्च 8 गांवों से होकर गुजरा

JD(S) ने बिदादी के पास प्रस्तावित GBIT प्रोजेक्ट और इसके लिए सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण के विरोध में एक पैदल मार्च निकाला. इस दौरान कुछ किसानों और ग्रामीणों ने भी पैदल मार्च में शामिल होकर सरकार के प्रोजेक्ट इसका विरोध किया. हमारी जमीन, हमारा अधिकार के नारे के साथ निकाले जा रहे इस मार्च की अगुवाई पार्टी की यूथ विंग के राज्य अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने किया. यह मार्च अंचीपुरा गांव से शुरू हुआ और 8 गांवों से गुजरते हुए होसुर की ओर बढ़ा.

9 गांवों की 7 हजार एकड़ जमीन टाउनशिप में जा रही

मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों में ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना शामिल है. इसे भारत की पहली एआई आधारित एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा रहा है. परियोजना के लिए क्षेत्र के नौ गांवों में लगभग 7,481 एकड़ भूमि की जरूरत है. इस जमीन के लिए अधिग्रहण की शुरूआत की जा रही है. लेकिन, किसान उपजाऊ जमीन, कम मुआवजा और जबरदस्ती उनकी भूमि हथियाने का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं.

राज्य रैयत संघ कल करेगा विरोध प्रदर्शन

किसान संगठन कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेतृत्व में किसानों और ग्रामीणों ने 22 जून को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय इलाकों के साथ ही पूरे बेंगलुरू में किए जाने का ऐलान किया गया है और इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. किसान नेताओं ने कहा कि कई अन्य किसान संगठनों ने भी उनकी लड़ाई का समर्थन किया है और आंदोलन में शामिल होने के लिए सहमति दी है.

उपजाऊ जमीन पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे – जेडीएस नेता

बिदादी प्रोजेक्ट के मुद्दे पर JDS नेता निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि हम लगभग 11 किलोमीटर का मार्च कर रहे हैं. हम किसानों के लिए लड़ने को तैयार हैं. सरकार ने किसानों की बात पर ध्यान नहीं दिया है. यहां की उपजाऊ जमीन पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे. उन्होंने सोशल और एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन) तक नहीं किया है. सरकार के पास पैसे नहीं हैं. वे HUDCO (हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) से लगभग 12.5 हजार करोड़ रुपये उधार लेने की कोशिश कर रहे हैं. अब, सरकार ने अपनी एक सहयोगी कंपनी के जरिए GBIT (ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप) अकाउंट में 25 करोड़ रुपये डाले हैं और वे किसानों से कह रहे हैं कि वे आकर ये पैसे ले लें.”

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Published: 21 Jun, 2026 | 05:43 PM

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