इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत शुक्रवार को हुई. इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत “वसुधैव कुटुंबकम” यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि दुनिया को शांति, सहयोग और साझेदारी के रास्ते पर चलकर ही कृषि और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का समाधान मिल सकता है…
शिवराज सिंह चौहान ने सभी देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति “अतिथि देवो भवः” की रही है. उन्होंने कहा कि भारत का संदेश साफ है – युद्ध नहीं, शांति. संघर्ष नहीं, समन्वय. यही सोच वैश्विक कृषि सहयोग को भी मजबूत बना सकती है.
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां दुनिया भर के किसानों के सामने हैं. ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों को मजबूत बनाना सबसे जरूरी है. उनका कहना था कि यदि छोटे किसान सशक्त होंगे तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी.
पिछले दस साल में 4.5 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्री ने भारत की कृषि उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दस वर्षों में कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई है. देश का कुल खाद्य उत्पादन बढ़कर लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है. गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है. वहीं मछली उत्पादन भी 19 मिलियन टन से अधिक पहुंच चुका है.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके जरिए करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय किसानों की मेहनत और सरकार की किसान–केंद्रित नीतियों को दिया.
तमाम सरकारी योजनाओं से मिली है कृषि क्षेत्र को मजबूती
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश की करीब 43 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं, नई तकनीक और किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिली है.
उन्होंने कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसान हैं. इसलिए सरकार की प्राथमिकता इन्हें आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं इसी दिशा में काम कर रही हैं.
मंत्री ने किया खेत बचाओ अभियान का जिक्र
प्राकृतिक खेती का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिट्टी की सेहत बचाने और खेती की लागत कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि “खेत बचाओ अभियान” के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और नई तकनीकों को पहुंचाया जा रहा है.
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए करोड़ों महिलाएं कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. वहीं “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में नई तकनीक पहुंचाने का काम कर रही हैं.
युवाओं को कृषि का भविष्य बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और नवाचार के जरिए युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने ब्रिक्स देशों से मिलकर छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और टिकाऊ कृषि विकास के लिए साथ काम करने का आह्वान किया. उनका कहना था कि यह सम्मेलन अनुभवों के आदान–प्रदान और सहयोग के जरिए वैश्विक कृषि को नई दिशा देने में मदद करेगा.