Mango Farming: आम के बौर से फल बनने तक अपनाएं ये आसान तरीके, मिठास और आकार दोनों होंगे जबरदस्त

आम में बौर आने का समय फसल की गुणवत्ता तय करता है. इस दौरान सही खाद, हल्की सिंचाई, कीटों से बचाव और छंटाई जैसे आसान उपाय अपनाने से फल बड़े, चमकदार, मीठे और ज्यादा रसीले बनते हैं. सही देखभाल से पैदावार बढ़ती है और बाजार में आम की कीमत भी बेहतर मिलती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Mar, 2026 | 09:22 PM

Mango Farming: गर्मी की दस्तक के साथ आम के बागों में बौर की खुशबू फैलने लगी है. यही वह समय है जब थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल आपके साधारण आमों को शहद जैसी मिठास, चमकदार रंग और भरपूर रस से भर सकती है. बौर से फल बनने तक का यह सफर बेहद नाजुक होता है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा अनुसार, पेड़ों को सही पोषण, समय पर पानी, कीटों से सुरक्षा और हल्की छंटाई मिले, तो पैदावार भी बढ़ती है और फलों की गुणवत्ता भी शानदार होती है. बागवानी से जुड़े जानकारों का कहना है कि छोटे-छोटे वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान और बागवान दोनों अपने आम की फसल को बाजार में बेहतर दाम दिला सकते हैं.

बौर के समय पेड़ों की सफाई और मिट्टी की देखभाल जरूरी

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, आम के पेड़ों की अच्छी  शुरुआत साफ-सफाई से होती है. पेड़ के आसपास उगी घास-फूस और खरपतवार को हटाना सबसे पहला काम होना चाहिए. तने के चारों ओर हल्की गुड़ाई करके गोल घेरा बना देने से सिंचाई का पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है. इससे मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होता है और जड़ों का विकास तेजी से होता है. मिट्टी ढीली रहने से पेड़ पोषक तत्वों को आसानी से सोख पाता है, जिसका सीधा असर बौर और बाद में फलों की क्वालिटी पर दिखता है.

सही खाद और पोटाश से बढ़ेगी आम की मिठास

इस समय पेड़ों को संतुलित पोषण  देना सबसे अहम है. सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित मिश्रण देना चाहिए. इनमें पोटाश सबसे खास माना जाता है, क्योंकि यही फल की चमक, आकार और मिठास बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है. खाद डालने के बाद मिट्टी में अच्छी तरह मिलाना जरूरी है, ताकि पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचें. इसके साथ जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से फलों के फटने की समस्या कम होती है और उनमें प्राकृतिक शर्करा बढ़ती है, जिससे आम ज्यादा रसीले बनते हैं.

सिंचाई, कीट नियंत्रण और फलों की छंटाई से मिलेगा बेहतर आकार

जब पेड़ों पर बौर आ रहे हों, तब ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए. लेकिन जैसे ही फल मटर के दाने जितने होने लगें, नियमित सिंचाई जरूरी हो जाती है. नमी की कमी से छोटे फल गिरने लगते हैं और आकार भी प्रभावित होता है. इसके साथ ही इस समय छोटे फलों और मंजरियों पर रस चूसने वाले कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में नीम तेल का छिड़काव  काफी असरदार माना जाता है. अगर एक टहनी पर बहुत ज्यादा फल लगे हों, तो कमजोर फलों को हटा देना चाहिए. इससे पेड़ की ताकत सीमित फलों पर लगती है और बाकी बचे आम बड़े, भारी और रसदार तैयार होते हैं.

हल्की छंटाई और धूप से आएगी प्राकृतिक मिठास

पेड़ के अंदर तक धूप और हवा पहुंचना भी उतना ही जरूरी है जितना खाद और पानी. घनी, सूखी और आपस में उलझी टहनियों की हल्की छंटाई करने से वेंटिलेशन बेहतर होता है. इससे रोगों का खतरा कम होता है और पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होती है. यही प्रक्रिया फलों में प्राकृतिक  मिठास बढ़ाने का काम करती है. जब धूप सही मात्रा में फलों तक पहुंचती है, तो उनका रंग भी निखरता है और स्वाद भी बेहतर होता है.

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Published: 30 Mar, 2026 | 09:22 PM
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