मछली पालकों को बड़ी राहत, फिश फीड हुआ सस्ता.. कीमत तय करने के लिए बनेगी समिति

आंध्र प्रदेश सरकार ने एक्वा किसानों को राहत देते हुए फीड की कीमत 4 रुपये प्रति किलोग्राम घटा दी है. अब फीड का MRP 112 रुपये से घटकर 108 रुपये हो गया है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए समिति गठित करने का ऐलान किया और किसानों को पानी व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 19 Jun, 2026 | 01:18 PM

आंध्र प्रदेश के मछली पालक किसानों को बड़ी राहत मिली है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मछली और झींगा पालन में इस्तेमाल होने वाले एक्वा फीड की कीमत 4 रुपये प्रति किलोग्राम घटाने का फैसला किया है. इसके बाद फीड का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 112 रुपये से घटकर 108 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. सरकार के इस फैसले से लाखों मछली पालक किसानों को सीधा फायदा होगा. उत्पादन लागत कम होगी और एक्वाकल्चर क्षेत्र को राहत मिलेगी.

वहीं, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि भविष्य में फीड की कीमतों  को स्थिर रखने के लिए एक समिति बनाई जाएगी. इस समिति में किसान, फीड निर्माता और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे. समिति को 20 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. रिपोर्ट में फीड की कीमत तय करने की व्यवस्था, उत्पादन से जुड़ी समस्याएं और प्रदूषण नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सुझाव दिए जाएंगे.

6 बार बढ़ाई गई फीड की कीमत

सचिवालय में बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में एक्वा फीड की कीमतें छह बार बढ़ाई गई थीं. वर्ष 2019 में फीड की कीमत 87.80 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो बढ़कर 107.80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, लेकिन उस समय इस पर कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं किया गया. किसानों ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने एक्वा क्षेत्र को कई तरह की राहत दी है. उन्होंने 1.50 रुपये प्रति यूनिट की रियायती बिजली उपलब्ध कराई, जिससे किसानों की लागत कम हुई है. किसानों ने यह भी कहा कि नायडू के प्रयासों से मत्स्य और झींगा पालन  का विस्तार केवल गोदावरी जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि श्रीकाकुलम से लेकर नेल्लोर तक पूरे तटीय क्षेत्र में एक्वाकल्चर का तेजी से विकास हुआ है.

झींगा तालाबों के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने की मांग

बैठक में किसानों ने झींगा तालाबों के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने, नर्सरी तालाबों को बढ़ावा देने, सब्सिडी से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट देने और एक्वाकल्चर गतिविधियों के लिए नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी रखी. वहीं, फीड कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सोयाबीन और फिशमील की कमी के कारण उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका से कम कीमत वाले सोयाबीन के आयात पर फिलहाल प्रतिबंध होने की वजह से कंपनियों को घरेलू बाजार से लगभग दोगुनी कीमत पर सोयाबीन खरीदना पड़ रहा है. इससे फीड बनाने की लागत काफी बढ़ गई है. कंपनियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के हिसाब से फीड की कीमत में 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने केवल 12 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की.

बिजली सब्सिडी के रूप में 1,543 करोड़ रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए भरोसा दिलाया कि एक्वाकल्चर गतिविधियों के लिए पानी की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को रोजगार देने वाले एक्वाकल्चर क्षेत्र की सुरक्षा और विकास करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र को बिजली सब्सिडी  के रूप में 1,543 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने और एक्वाकल्चर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

 

 

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Published: 19 Jun, 2026 | 01:17 PM

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