चीन को चावल निर्यात करना हुआ सख्त, अब हर खेप की होगी GMO जांच, APEDA ने लागू किए नए नियम

India Rice Export: चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की कुछ खेपों में GMO होने की आशंका जताई थी. इसके बाद सरकार ने चीन को चावल भेजने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. अब चीन भेजे जाने वाले हर चावल की GMO जांच जरूरी होगी.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 13 Jun, 2026 | 09:16 AM

Non Basmati Rice Export: चीन को चावल भेजने वाले भारतीय कारोबारियों के लिए अब कुछ नए नियमों का पालन करना जरूरी होगा. दरअसल, चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की कुछ खेपों में GMO (जेनेटिक रूप से बदले गए जीव) की मौजूदगी की आशंका जताई थी. इसके बाद सरकार ने चावल निर्यात से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. इसी को देखते हुए एपीडा (APEDA) ने नई नए दिशा-निर्देश (SOP) लागू की है, जो 9 जून 2026 से प्रभावी हो गई है. इसका मकसद चीन जैसे बड़े बाजार में भारतीय चावल की अच्छी छवि बनाए रखना और निर्यात के दौरान आने वाली दिक्कतों को कम करना है.

चीन की आपत्ति के बाद बढ़ी सख्ती

पिछले कुछ महीनों में चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की कुछ खेपों में GMO की आशंका जताते हुए उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया था. हालांकि भारत ने साफ कहा था कि देश में GM चावल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है और भारतीय चावल पूरी तरह गैर-GMO है. इसके बावजूद चीन अपने नियमों पर कायम रहा. ऐसे में चावल निर्यात में किसी तरह की परेशानी न आए, इसके लिए एपीडा (APEDA) ने सभी निर्यातकों के लिए एक जैसी और सख्त जांच प्रक्रिया लागू करने का फैसला किया है.

अब क्या होंगे नए नियम?

नए नियमों के मुताबिक, चीन भेजे जाने वाले हर चावल के माल की GMO जांच कराना जरूरी होगा. इसके अलावा सिर्फ वही राइस मिल और प्रोसेसिंग यूनिट चीन को चावल भेज सकेंगी, जिन्हें सरकार की मंजूरी मिली होगी. निर्यातकों को भी सिर्फ सरकार द्वारा मंजूर इकाइयों से ही चावल खरीदना होगा. साथ ही चावल भेजने से पहले जरूरी सरकारी कागजात और जांच रिपोर्ट भी लेनी होगी. चावल के नमूनों की जांच एपीडा (APEDA) से मान्यता प्राप्त लैब में की जाएगी. जांच पूरी होने तक उस चावल के स्टॉक को कहीं और नहीं भेजा जा सकेगा. जांच रिपोर्ट सही मिलने के बाद ही चावल को चीन भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.

चीन क्यों है भारतीय चावल के लिए अहम बाजार?

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन भारतीय गैर-बासमती चावल, खासकर टूटे हुए चावल (ब्रोकन राइस), का बड़ा खरीदार बन गया है. पिछले कुछ सालों में चीन की मांग लगातार बढ़ी है, जिससे भारतीय कारोबारियों को चावल बेचने के लिए एक बड़ा और भरोसेमंद बाजार मिला है. राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, कई अफ्रीकी देशों में नियम सख्त होने के बाद चीन की अहमियत और बढ़ गई है. यही वजह है कि, भारतीय चावल कारोबारी चीन को अपने लिए एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं.

अफ्रीकी देशों में बढ़ी चुनौतियां

सेनेगल, बुर्किना फासो, बेनिन और सूडान जैसे कुछ अफ्रीकी देशों ने चावल के आयात पर सख्ती बढ़ाई है. इसका असर भारतीय गैर-बासमती चावल की बिक्री पर भी पड़ा है. इसी वजह से एपीडा (APEDA) अब चीन के अलावा फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी भारतीय चावल के लिए नए बाजार और नए खरीदार तलाश रहा है.

भारत ने चीन के सामने रखा अपना पक्ष

भारत ने चीन के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में साफ कहा है कि, देश में GM चावल के बीज उपलब्ध नहीं हैं और इसकी खेती की अनुमति भी नहीं है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) ने भी इसकी पुष्टि की है. इसके बावजूद चीन ने अपने नियमों में कोई ढील नहीं दी. इसी वजह से भारत को चावल निर्यात के लिए नए नियम लागू करने पड़े, ताकि चीन को भेजे जाने वाले चावल पर किसी तरह का सवाल न उठे.

तेजी से बढ़ा चीन को चावल निर्यात

पिछले कुछ सालों में चीन को भारतीय गैर-बासमती चावल की बिक्री तेजी से बढ़ी है. साल 2019-20 में जहां भारत ने चीन को सिर्फ 567 टन चावल भेजा था, वहीं बाद के सालों में यह मात्रा बढ़कर लाखों टन तक पहुंच गई. वित्त साल 2025-26 में भारत ने चीन को 3.15 लाख टन से ज्यादा गैर-बासमती चावल भेजा. इसी के साथ चीन भारतीय गैर-बासमती चावल के बड़े खरीदारों में शामिल हो गया है.

निर्यातकों ने मांगी तैयारी की मोहलत

नई व्यवस्था लागू होने के बाद चावल कारोबारियों ने सरकार से कुछ समय देने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले से किए गए निर्यात सौदों को देखते हुए 31 जुलाई 2026 तक पुराने नियमों के तहत चावल भेजने की अनुमति मिलनी चाहिए. कारोबारियों का कहना है कि इससे उन्हें नए नियमों के मुताबिक अपनी तैयारियां पूरी करने और जरूरी इंतजाम करने का समय मिल जाएगा.

क्या होगा इसका असर?

शुरुआत में नए नियमों के कारण निर्यातकों को ज्यादा जांच और कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. इससे समय और खर्च दोनों कुछ बढ़ सकते हैं. हालांकि लंबे समय में यह कदम भारत के लिए फायदेमंद माना जा रहा है. इससे भारतीय चावल की गुणवत्ता और भरोसेमंद छवि मजबूत होगी, और चीन जैसे बड़े बाजार में पहुंच बनाए रखने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय चावल निर्यात को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और भविष्य के व्यापारिक जोखिमों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़