कैमल सेक्टर में टेक्नोलॉजी की एंट्री, अब ऊंटों के पास भी होगा पासपोर्ट…इस वजह से लागू हुई योजना

यह फैसला सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी विजन 2030 का हिस्सा है. इस विजन के तहत देश पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहता है. तेल पर निर्भरता कम कर अर्थव्यवस्था को विविध बनाना इसका बड़ा लक्ष्य है. ऊंट पालन जैसे पारंपरिक क्षेत्र को डिजिटल पहचान देना इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 10 Feb, 2026 | 08:40 AM

अब तक आपने पासपोर्ट को इंसानों की पहचान और विदेश यात्रा से जोड़कर ही देखा होगा, लेकिन दुनिया बदल रही है और सोच भी. मध्य-पूर्व के एक देश ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने पशुपालन की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है. सऊदी अरब ने ऊंटों के लिए आधिकारिक पासपोर्ट जारी करने का ऐलान कर दिया है. यह कदम सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ऊंट पालन, व्यापार और देखभाल का पूरा सिस्टम ही बदलने वाला है.

ऊंट क्यों हैं इतने खास?

सऊदी अरब में ऊंट महज जानवर नहीं माने जाते. वे यहां की संस्कृति, परंपरा और पहचान का हिस्सा हैं. कभी रेगिस्तान में सफर और जीवन का सहारा रहे ऊंट आज एक बड़ा आर्थिक संसाधन बन चुके हैं. देश में ऊंटों की खरीद-बिक्री होती है, रेस कराई जाती है और सौंदर्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं. कई ऊंट तो करोड़ों रुपये में बिकते हैं. ऐसे में सरकार के सामने चुनौती थी कि इतने बड़े सेक्टर को कैसे व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाए.

किसने किया पासपोर्ट सिस्टम का ऐलान?

ऊंट पासपोर्ट योजना की घोषणा पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय के उप मंत्री मनसूर अलमुशैती ने की. उन्होंने बताया कि सरकार ने कैमल पासपोर्ट सिस्टम को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. इसका मकसद हर ऊंट की अलग पहचान बनाना है, ताकि मालिकाना हक, स्वास्थ्य और टीकाकरण से जुड़ी जानकारी एक ही जगह सुरक्षित रहे.

विजन 2030 से जुड़ी है पूरी सोच

यह फैसला सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी विजन 2030 का हिस्सा है. इस विजन के तहत देश पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहता है. तेल पर निर्भरता कम कर अर्थव्यवस्था को विविध बनाना इसका बड़ा लक्ष्य है. ऊंट पालन जैसे पारंपरिक क्षेत्र को डिजिटल पहचान देना इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.

कैसा होगा ऊंटों का पासपोर्ट?

सरकार ने ऊंट पासपोर्ट की झलक भी सामने रखी है. यह हरे रंग का पासपोर्ट होगा, जिस पर देश का राष्ट्रीय प्रतीक और ऊंट की तस्वीर छपी होगी. अनुमान के मुताबिक सऊदी अरब में करीब 22 लाख ऊंट हैं और सभी को चरणबद्ध तरीके से इस सिस्टम में शामिल किया जाएगा. यानी आने वाले समय में हर ऊंट की एक सरकारी पहचान होगी.

आखिर जरूरत क्यों महसूस हुई?

अरब देशों में ऊंटों का इतिहास हजारों साल पुराना है, लेकिन समय के साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं. ऊंटों की संख्या ज्यादा होने के कारण पहचान, मालिकाना हक और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती थी. बीमारियों की निगरानी और टीकाकरण का कोई एकीकृत रिकॉर्ड नहीं था. व्यापार के दौरान धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. इन्हीं समस्याओं के समाधान के तौर पर ऊंट पासपोर्ट की अवधारणा सामने आई.

पासपोर्ट में दर्ज होगी पूरी कुंडली

ऊंट का पासपोर्ट एक तरह से उसकी पूरी पहचान फाइल होगा. इसमें माइक्रोचिप नंबर, पासपोर्ट नंबर, ऊंट का नाम, जन्म तिथि, नस्ल, रंग, लिंग और जन्म स्थान दर्ज रहेगा. इसके साथ मालिक का नाम, विवरण और पासपोर्ट जारी करने वाली अथॉरिटी की जानकारी भी होगी. ऊंट की दोनों ओर से ली गई तस्वीरें भी इसमें शामिल रहेंगी. सबसे अहम हिस्सा होगा स्वास्थ्य और टीकाकरण रिकॉर्ड, जिसमें लगाए गए सभी टीकों की जानकारी, पशु चिकित्सक का नाम, हस्ताक्षर और मुहर दर्ज होगी.

क्या होंगे इसके बड़े फायदे?

सरकार का कहना है कि इस सिस्टम से ऊंट सेक्टर को कई स्तरों पर फायदा होगा. ऊंटों की खरीद-बिक्री ज्यादा भरोसेमंद बनेगी और मालिकाना हक को लेकर विवाद कम होंगे. एक राष्ट्रीय ऊंट डेटाबेस तैयार होगा, जिससे निगरानी और प्रबंधन आसान होगा. बीमारियों पर समय रहते काबू पाया जा सकेगा और अवैध गतिविधियों पर भी रोक लगेगी. कुल मिलाकर, ऊंट पासपोर्ट सऊदी अरब के कैमल सेक्टर को आधुनिक, सुरक्षित और ज्यादा संगठित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.

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