छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों का गुस्सा भड़क गया है. बालोद में 1100 से ज्यादा किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और गन्ना विभाग के खिलाफ नारेबाजी की. गन्ना उत्पादन किसान संघ के नेतृत्व में जुटे किसानों ने कहा कि करकाभाट स्थित शक्कर कारखाना में 9 महीने से का भुगतान नहीं किया गया है. किसान अपने पैसे के लिए 9 महीने से गुहार लगा रहे हैं. लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है. किसानों ने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ना किसानों को 14 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी देने का वादा किया था, जिसका भी अब तक भुगतान नहीं किया गया है.
गन्ना उत्पादन किसान संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा साहू ने कहा कि किसानों का लंबे समय से गन्ना भुगतान नहीं किया गया है. बालोद जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया है और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है. उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी. किसानों का कई सौ करोड़ रुपये शक्कर कारखाने पर बकाया है, जिसे देने में टाला-मटोली की जा रही है.
गन्ना भुगतान और बोनस राशि 9 महीने से बकाया
गन्ना उत्पादक किसानों का कहना है कि उन्होंने जिले के करकाभाट शक्कर कारखाना में अपना गन्ना बेचा है, लेकिन कई मदों की राशि अब तक उन्हें नहीं मिल पाई है.किसानों के अनुसार गन्ना की रिकवरी राशि 40 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलनी थी, जो करीब नौ माह बीत जाने के बाद भी लंबित है. इसके अलावा किसानों ने शासन की ओर से मिलने वाली 50 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि का भुगतान भी नौ माह से नहीं होने की बात कही है.

गन्ना उत्पादक किसान संघ ने कलेक्टर से भुगतान कराने की मांग की.
14 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी गई
किसानों का आरोप है कि गन्ना किसानों से बीज लेकर दूसरे किसानों को उपलब्ध कराया गया था, लेकिन उसकी राशि का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है. वहीं, नए गन्ना उत्पादक किसानों को बीज सहित 14 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह राशि भी अब तक किसानों को नहीं मिली है.
प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी
गन्ना उत्पादन किसान संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा साहू ने कहा कि किसानों ने प्रशासन से सभी लंबित भुगतानों का जल्द निराकरण करने की मांग की है. प्रशासन को उनकी मांगों के समाधान के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. यदि निर्धारित अवधि में उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो जिले के सभी 1100 गन्ना उत्पादक किसान एकजुट होकर उग्र आंदोलन करेंगे. जो प्रदेश स्तर पर भी व्यापक रूप से विस्तारित किया जाएगा.