बकरी पालने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सालभर पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता है. मौसम बदलने के साथ चारे की उपलब्धता और गुणवत्ता भी बदल जाती है और ऐसे में किसानों को मौसमी चराई, फसल अवशेष और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध दूसरे संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए द गोट ट्रस्ट (The Goat Trust) और शून्य एग्रीटेक (Shunya Agritech) ने रणनीतिक साझेदारी की है.
दोनों संस्थाएं मिलकर बकरी किसानों को सालभर पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को चारा देने के बारे में जागरूक और प्रशिक्षित करेंगी. इसके साथ ही किसानों को हाइड्रोपोनिक फोडर यानी बिना मिट्टी के तकनीक से हरा चारा तैयार करने की जानकारी और इसका व्यावहारिक डेमो भी दिया जाएगा.
सिर्फ तकनीक नहीं, किसानों को दिया जाएगा प्रैक्टिकल प्रशिक्षण
इस साझेदारी का फोकस केवल हाइड्रोपोनिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा. दोनों संस्थाएं किसानों के साथ सीधे जुड़कर उन्हें वैज्ञानिक फीडिंग और सालभर पोषण की जरूरत समझाएंगी. इसके लिए किसान डेमो, ट्रेनिंग सेशन, वर्कशॉप और फील्ड विजिट आयोजित किए जाएंगे.
कार्यक्रम में FPOs, पशुपालन से जुड़े संगठन और सरकारी संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा. द गोट ट्रस्ट के लखनऊ कैंपस में मौजूद हाइड्रोपोनिक फोडर सुविधा को लाइव ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. किसान यहां हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन को नजदीक से समझ सकेंगे और यह भी जान सकेंगे कि ताजा चारे को अपनी मौजूदा फीडिंग व्यवस्था में किस तरह शामिल किया जा सकता है.
कम जमीन और सीमित संसाधन वाले किसानों के लिए उपयोगी
बकरी पालन देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. इसकी वजह यह है कि इसमें शुरुआती लागत अपेक्षाकृत कम होती है और सीमित जमीन और संसाधनों के साथ भी इसे किया जा सकता है. लेकिन बकरियों की उत्पादकता पर पोषण का सीधा असर पड़ता है. पूरे साल पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता नहीं होने से किसानों के लिए बेहतर पोषण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है.
यह पहल खासतौर पर उन बकरी पालन वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जहां किसानों के पास सीमित जमीन, सिंचाई की सुविधा या नियमित हरे चारे का भरोसेमंद स्रोत नहीं है. दोनों संस्थाएं किसानों के अनुभव, चारा उत्पादन की लागत और उनके फीडबैक का डेटा भी जुटाएंगी. इसका उद्देश्य ऐसे मॉडल तैयार करना है, जिन्हें सफल होने पर दूसरे बकरी पालन वाले क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके.
पोषण को बनाया जाएगा बकरी पालन की अहम कड़ी
द गोट ट्रस्ट के प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. पंकज यादव ने कहा कि इस साझेदारी से किसानों के लिए सार्थक अवसर पैदा होंगे और इसका टिकाऊ सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है.
शून्य एग्रीटेक के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर प्रदीप अय्यर ने कहा कि भारत में छोटे पशुओं के लिए नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों पर काफी काम हुआ है. अब भरोसेमंद पोषण इन प्रयासों के नतीजों को और मजबूत करने वाली अहम कड़ी बन सकता है. साझेदारी का उद्देश्य किसानों को जोड़ना, समाधान का डेमो देना, स्थानीय स्तर पर क्षमता विकसित करना और फील्ड से ऐसा डेटा तैयार करना है, जो आगे बड़े स्तर पर इस मॉडल को अपनाने में मदद कर सके.