Bhoramdev Sahakari Chini Mill: छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों को सहकारी चीनी मिल ने गन्ना भुगतान (Sugarcane Payment) कर दिया है. राज्य की भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने अपने करीब 12 हजार किसानों को भुगतान कर दिया है. मिल ने चालू सीजन में 2.55 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की है. यह चीनी राज्य की सबसे बड़ी चीनी मिलों में शामिल है और चीनी के साथ ही गुड़ और इथेनॉल बनाने के लिए जानी जाती है.
भोरमदेव शक्कर मिल ने किसानों को 6 करोड़ का भुगतान किया
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के राम्हेपुर स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना (Bhoramdev Sahakari Shakkar Utpadak Karkhana) ने गन्ना उत्पादक किसानों को 6 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. प्रशासनिक बयान में कहा गया है कि चीनी मिल ने अपने गन्ना किसानों को गन्ना पेमेंट पूरा कर दिया गया है. भोरमदेव सहकारी चीनी मिल राज्य की बड़ी चीनी मिलों में शामिल है और इस मिल से हजारों की संख्या में किसान जुड़े हैं.
3.09 लाख टन चीनी का उत्पादन और कुल भुगतान 57 करोड़ का पूरा
चीनी मिल प्रबंधन ने कहा है कि गन्ना उत्पादक किसानों को अब तक कुल 57 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि का भुगतान किया जा चुका है. कारखाना प्रबंधन ने बताया कि चालू सत्र में 2.55 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई और 3.09 लाख क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया जा चुका है.
- Agriculture Budget: कृषि योजनाओं के लिए नहीं बढ़ा बजट, खेती पर खर्च होंगे 1.62 लाख करोड़ रुपये.. पढ़ें डिटेल्स
- Budget 2026: ‘विकसित भारत’ का दावा या जनता को धोखा? बजट पेश होते ही ममता से अखिलेश तक भड़के विपक्षी नेता!
- बजट में रिफॉर्म्स पर फोकस.. ग्रामीण विकास समेत इन सेक्टर्स को बूस्ट देने की घोषणाएं, पढ़ें- कृषि मंत्री ने क्या कहा
गन्ना किसानों का पेमेंट रेगुलर होने से किसान खुश
बयान में कहा गया है कि कलेक्टर और फैक्ट्री के ऑथराइज्ड ऑफिसर गोपाल वर्मा की गाइडेंस में किसानों को गन्ना पेमेंट प्रोसेस रेगुलर जारी है. इससे किसानों का कोऑपरेटिव सिस्टम पर भरोसा और मजबूत हुआ है. फैक्ट्री मैनेजमेंट का कहना है कि लगातार पेमेंट से न सिर्फ किसानों की फाइनेंशियल हालत मजबूत हो रही है, बल्कि फैक्ट्री के ऑपरेशन्स को भी स्टेबिलिटी मिल रही है.
किसानों के सहयोग से मिल का सफल ऑपरेशन पूरा
प्रबंधन ने पेराई सीजन के बारे में बताया कि अब तक 255,455 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है, जिससे 374,322 क्विंटल चीनी बनी है. इस कामयाबी का क्रेडिट किसानों के सहयोग, एडमिनिस्ट्रेटिव गाइडेंस और फैक्ट्री के बेहतर कामकाज को दिया गया है. इसके चलते मिल ने चीनी के साथ गुड़ और इथेनॉल प्रोडक्शन को भी बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है.