सिंथेटिक और मिलावटी दूध के कारोबार डेयरी किसानों को तो आर्थिक चोट पहुंचा ही रहा है, बल्कि लोगों की सेहत को भी बर्बाद कर रहा है. इसके विरोध में पंजाब के अमृतसर में डेयरी किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों लीटर दूध सड़क पर बहा दिया. डेयरी किसानों की यूनियन के नारेबाजी और जोरदार प्रदर्शन के बाद जागे प्रशासन ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाने और पनीर, मिठाइयों समेत अन्य दूध उत्पादों की जांच करने का भरोसा दिया है. यूनियन ने कहा कि अगर डेयरी किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा.
पंजाब के अमृतसर और उसके आसपास मिलावटी दूध बेचने वाली दुकानों के खिलाफ कथित तौर पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज होकर डेयरी किसानों ने सोमवार को जिला प्रशासन परिसर में सैकड़ों लीटर दूध बहा दिया. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर की ज्यादातर दुकानें कथित तौर पर मिलावटी दूध बेच रही हैं, और यह भी दावा किया कि ऐसे खराब दूध से बने पनीर जैसे उत्पाद सेहत के लिए नुकसानदायक हैं. किसानों ने आरोप लगाया कि मिठाई बनाने वाले और डेयरी उत्पादों के अन्य छोटे विक्रेता कथित तौर पर सस्ते दाम पर सिंथेटिक दूध बेच रहे हैं. किसानों ने डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार हृदय पाल को सौंपा.
किसान का असली दूध 80 रुपये, मिलावटी दूध 60 रुपये में बिक रहा
अमृतसर ढोढ़ी यूनियन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने मीडिया को बताया कि सभी मदों के खर्चों का हिसाब लगाने के बाद, दूध की उत्पादन लागत लगभग 80 रुपये प्रति लीटर बैठती है, और डेयरी किसान तभी अपना गुजारा कर सकते हैं जब वे दूध को इस दर से ज्यादा कीमत पर बेचें. उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग उत्पादन के नकली और संदिग्ध तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे बाजार में खुलेआम लगभग 60 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेच रहे हैं.
ग्राहक सस्ते के लालच में खरीद रहे मिलावटी दूध उत्पाद
उन्होंने कहा कि ग्राहक सिर्फ कीमतों की तुलना करते हैं और क्वालिटी पर शायद ही कभी ध्यान देते हैं. वे सस्ता उपलब्ध दूध खरीदते हैं, जिससे असली डेयरी किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि ऐसे विक्रेता बाजार पर कब्जा कर लेते हैं, जबकि शुद्ध और पौष्टिक दूध के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है. उन्होंने आगे कहा कि असली डेयरी किसान अक्सर अपने बिना बिके दूध को और ज्यादा नुकसान से बचने के लिए कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी फैक्टर मिलकर डेयरी किसान को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
असली पनीर 500 रुपये और मिलावटी 300 रुपये किलो
डेयरी किसानों ने कहा कि मिलावटी पनीर और खोया खुलेआम लगभग 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जा रहे हैं. जबकि असली डेयरी किसानों के लिए इनकी उत्पादन लागत लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है. उन्होंने आगे कहा कि असली डेयरी किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनके बच्चे इस पेशे को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं हैं.
मिलावटखोरों के नाम का खुलासा करे सरकार
डेयरी किसानों ने कहा कि एक डेयरी किसान सुबह 3 बजे उठ जाता है ताकि यह पक्का हो सके कि दूध सुबह 7 बजे तक शहर पहुंच जाए. उन्होंने कहा कि पहले स्वास्थ्य विभाग उन डेयरी संचालकों के नाम सार्वजनिक करता था जिनके उत्पाद क्वालिटी परीक्षण में फेल हो जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. सरकार से अपील की कि वह दोषियों के नाम उजागर करे ताकि लोग असली स्थिति को समझ सकें और मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जाए. अगर डेयरी किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन होगा.