अब फसल नहीं होगी खराब, किसानों के लिए गांव-गांव शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी योजना

यह योजना सिर्फ गोदाम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरी कृषि व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) और अन्य सहकारी समितियों के स्तर पर कई तरह की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

नई दिल्ली | Updated On: 19 Mar, 2026 | 03:11 PM

India grain storage scheme: भारत में किसानों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है फसल का सही भंडारण न होना. कई बार मेहनत से उगाई गई फसल सही समय पर सही जगह स्टोर न होने के कारण खराब हो जाती है या किसान मजबूरी में कम दाम पर बेच देता है. इसी बड़ी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है.

PIB की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2023 को सरकार ने “सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना” को मंजूरी दी थी, जिसे अब पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है. इस योजना का सीधा मकसद है कि गांव स्तर पर ही आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से अनाज भंडारण की सुविधा तैयार हो, ताकि किसानों को अपनी फसल के लिए बेहतर विकल्प मिल सके.

क्या है यह योजना और क्यों है खास?

यह योजना सिर्फ गोदाम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरी कृषि व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) और अन्य सहकारी समितियों के स्तर पर कई तरह की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

इनमें शामिल हैं:

सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए कई योजनाओं को एक साथ जोड़ा है, जैसे AIF (Agriculture Infrastructure Fund), AMI, SMAM और PMFME. इससे किसानों को एक ही जगह कई सुविधाएं मिलेंगी.

किसानों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को सीधे तौर पर मिलने वाला है. अभी तक किसान फसल कटते ही उसे बेचने के लिए मजबूर हो जाते थे, क्योंकि उनके पास सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं होती थी. लेकिन अब जब गांव में ही गोदाम बनेंगे, तो किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख पाएंगे और बाजार में सही समय का इंतजार कर सकेंगे.

इसका असर यह होगा कि किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा, नुकसान कम होगा और उनकी आय में स्थिरता आएगी. यह कदम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काफी अहम माना जा रहा है.

सस्ती दर पर लोन और सब्सिडी से बड़ी राहत

सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए वित्तीय स्तर पर भी बड़ी राहत दी है. गोदाम निर्माण पर 33 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा AIF योजना के तहत 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी मिलती है, जिससे लोन की प्रभावी ब्याज दर घटकर लगभग 1 प्रतिशत तक आ जाती है.

मार्जिन मनी की शर्त को भी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे सहकारी समितियों के लिए निवेश करना आसान हो गया है. साथ ही निर्माण लागत को भी बढ़ाया गया है, ताकि बेहतर गुणवत्ता के गोदाम तैयार किए जा सकें.

FCI की 9 साल की गारंटी से बढ़ेगा भरोसा

इस योजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इन गोदामों के लिए 9 साल की हायरिंग गारंटी देने पर सहमति दी है. इसका मतलब यह है कि सहकारी समितियों को लंबे समय तक आय की चिंता नहीं रहेगी और उनका निवेश सुरक्षित रहेगा. इससे इस योजना की आर्थिक मजबूती और बढ़ जाती है.

तय प्रक्रिया के तहत होगा काम

इस योजना को लागू करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया बनाई गई है. सबसे पहले राज्य का सहकारिता विभाग ऐसे PACS और समितियों की पहचान करता है, जिनके पास जमीन और जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं. इसके बाद जिला स्तर पर मंजूरी दी जाती है और FCI, NAFED, NCCF जैसी एजेंसियां हायरिंग एश्योरेंस देती हैं.

फिर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होती है और बैंक से लोन व सब्सिडी की मंजूरी ली जाती है. इसके बाद करीब 6 महीने के भीतर गोदाम का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जल्दी से किसानों को इसका लाभ मिल सके.

अब तक कितना काम हुआ

इस योजना के तहत अब तक देशभर में 560 सहकारी समितियों की पहचान की जा चुकी है. इनमें से 120 समितियों में गोदाम बनकर तैयार भी हो चुके हैं, जिससे 72,702 मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता तैयार हुई है.

इसके अलावा देश के 378 जिलों में करीब 46.92 लाख मीट्रिक टन भंडारण की कमी चिन्हित की गई है, जिसे आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा.

कोल्ड चेन से बढ़ेगा किसानों का दायरा

यह योजना सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं है, बल्कि फल और सब्जियों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आई है. इसके तहत कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और रेफ्रिजरेशन वैन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.

इससे किसानों को अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. खासकर बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह योजना बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है.

Published: 19 Mar, 2026 | 03:06 PM

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