GM सरसों को केंद्र सरकार से मिल सकती है मंजूरी, क्या अब किसान करेंगे खेती?
भारत सरकार जल्द ही GM सरसों हाइब्रिड को मंजूरी दे सकती है, जिससे तेल बीज उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी. मध्य प्रदेश की सोयाबीन ‘भावांतर भुगतान योजना’ और 184 जलवायु-प्रतिरोधी बीज किस्में किसानों की आय स्थिर रखने और फसल प्रतिरोध बढ़ाने में मदद कर रही हैं.
GM Mustard: सोल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने कहा है कि भारत सरकार जल्द ही जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सरसों हाइब्रिड को मंजूरी देने वाली है. SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने अपने मासिक पत्र में कहा है कि यह कदम भारत की कृषि-बायोटेक नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है. इस प्रस्तावित मंजूरी से पहले व्यापक बायोसेफ्टी परीक्षण और फील्ड ट्रायल किए गए हैं. GM सरसों में उच्च उपज, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और तेल की अच्छी निकासी जैसी विशेषताओं पर ध्यान दिया गया है. अगर मंजूरी मिलती है, तो यह भारत में तेल बीज उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है. यह कदम दिखाता है कि सरकार उन्नत तकनीकों को अपनाने में सतर्क लेकिन प्रगतिशील दृष्टिकोण रखती है.
साथ ही, उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार को खरिफ 2025-26 के लिए सोयाबीन ‘भावांतर भुगतान योजना’ (BBY) फिर से शुरू करने पर बधाई दी. इस योजना के तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी मिलती है. अगर मंडी भाव MSP से कम होता है, तो अंतर सीधे किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है. इससे किसानों को सही दाम मिलता है, उद्योग को सोयाबीन खरीदने में सुविधा रहती है, और सरकार को बड़े पैमाने पर खरीद, भंडारण और खर्च का झंझट नहीं झेलना पड़ता.
16 लाख टन सोयाबीन किसानों ने बेच दी
दिसंबर 2025 तक, मध्य प्रदेश सरकार की सोयाबीन ‘भावांतर भुगतान योजना’ (BBY) के तहत लगभग 16 लाख टन सोयाबीन किसानों ने बेच दी है, जबकि मंजूर मात्रा 22 लाख टन थी. यह योजना किसानों की आय स्थिर रखने और सोयाबीन वैल्यू चेन को समर्थन देने में काफी असरदार साबित हो रही है. सरकार ने 25 फसलों के लिए 184 जलवायु-प्रतिरोधी बीज किस्में भी जारी की हैं. ये किस्में अधिक उपज, सूखा, गर्मी या कीट प्रतिरोध और बेहतर पोषणीय गुणों के साथ किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी. इसका उद्देश्य जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना और आने वाले सीजन में फसलों की मजबूती और स्थिर आय सुनिश्चित करना है.
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बदलने की तैयारी बदलते उपभोग पैटर्न को दर्शाती है
संजीव अस्थाना ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के बेस वर्ष को 2024 में बदलने की तैयारी बदलते उपभोग पैटर्न को दर्शाती है. तेल बीज और खाने के तेल के मामले में यह महत्वपूर्ण है कि सूचकांक वर्तमान खपत वास्तविकताओं को सही ढंग से दिखाए. SEA ने पहले भी WPI संशोधन में सुझाव दिया था कि खाने के तेल की खपत में बदलाव आया है, इसलिए तेल के वजन को डेटा के आधार पर सही करना जरूरी है ताकि मुद्रास्फीति का सही आकलन हो और किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योग का उचित प्रतिनिधित्व हो सके.