मौसमी बदलाव का गेहूं और सरसों पर पड़ेगा असर! विशेषज्ञों ने दी किसानों को सतर्क रहने की सलाह

पंजाब के अमृतसर में मौसमी बदलाव के कारण गेहूं और सरसों की फसलों में फंगल और वायरल रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने हल्की सिंचाई और 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने की सलाह दी है, ताकि दानों का वजन और पैदावार सुरक्षित रहे.

नोएडा | Published: 20 Feb, 2026 | 02:00 PM

Punjab Agriculture News: पंजाब के अमृतसर में मौसमी बदलाव के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इससे बढ़ती नमी के कारण कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और गेहूं और सरसों की फसलों को संभावित रोगों से बचाने के लिए समय पर कदम उठाने की सलाह दी है. कृषि विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में फसलों में फंगल और वायरल रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है. गेहूं के खेतों में पीली जंग, पत्ती ब्लाइट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे लक्षणों पर नियमित निगरानी जरूरी है. समय रहते इन रोगों का पता लगाकर सुझाए गए फंगीसाइड का छिड़काव करने से संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है और फसल की पैदावार सुरक्षित रहती है.

इसी तरह, सरसों के किसानों को भी फसल में रोगों पर नजर रखने की सलाह दी गई है. सरसों किसानों को कहा गया है कि व्हाइट रस्ट और डाउनियों मिल्ड्यू  जैसे कीट पत्तियों और फलियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में विशेषज्ञ खेत की सफाई, संतुलित उर्वरक उपयोग और जरूरत के अनुसार कीटनाशकों का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं. किसानों को बादलों वाले मौसम में अधिक सिंचाई करने से बचने के लिए भी कहा गया है, क्योंकि ज्यादा नमी से रोग तेजी से फैल सकते हैं. साथ ही, किसी भी रासायनिक दवा का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारियों से सही मात्रा और छिड़काव के तरीके पर सलाह लेने की सलाह दी गई है.

बढ़ता तापमान दानों का वजन कम कर सकता है

वहीं, कृषि विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि गेहूं की फसल में जब बालियां बनने और दाने भरने का समय आता है, तो बढ़ता तापमान दानों का वजन कम कर सकता है, पकने की प्रक्रिया तेज कर सकता है. ऐसे में पैदावार और गुणवत्ता  घट सकती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के एक्सटेंशन एजुकेशन निदेशक डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने किसानों को सलाह दी है कि फसल की पत्तियों और पूरे प्लांट को ठंडा रखने के लिए हल्की सिंचाई करें, ताकि तापमान का तनाव कम हो.

किसान करें इस दवा का छिड़काव

साथ ही, एग्रीनॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. हरी राम ने सुझाव दिया कि बूट लीफ और एंथेसिस स्टेज पर शाम के समय 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट (4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर) का दो बार छिड़काव किया जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों से उच्च तापमान के नकारात्मक असर को कम किया जा सकता है, दानों का वजन बेहतर रखा जा सकता है और पैदावार की सुरक्षा में मदद मिलती है.

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