एक्शन में केंद्र, किसानों का पैसा रोकने पर राज्य और एजेंसियों को अब देना पड़ेगा 12 फीसदी ब्याज

केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपने हिस्से का भुगतान समय पर करेगी और अगर राज्यों की ओर से देरी होती है, तो केंद्र सीधे किसान के खाते में पैसा भेजने के विकल्प पर काम कर रहा है. उनका संदेश था कि किसानों को लाभ समय पर और बिना अड़चन पहुंचे.

नोएडा | Updated On: 25 Feb, 2026 | 03:20 PM

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से तकनीक पर आधारित खेती करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि कृषि यंत्रों की मदद से खेती करने पर लागत और समय की बचत होगी और किसानों की कमाई में इजाफा होगा. उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार 18 से अधिक योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं के माध्यम से ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. वहीं, कृषि सुधारों पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के बकाया भुगतान में हो रही देरी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अब कोई भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोककर नहीं रख सकती. ऐसा करने पर 12 फीसदी ब्याज देना होगा.

मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपने हिस्से का भुगतान समय पर  करेगी और अगर राज्यों की ओर से देरी होती है, तो केंद्र सीधे किसान के खाते में पैसा भेजने के विकल्प पर काम कर रहा है. उनका संदेश था कि किसानों को लाभ समय पर और बिना अड़चन पहुंचे. साथ ही उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लिए सिर्फ पैसा भेज देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसका क्रियान्वयन भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में होने के बावजूद केवल 158 किसानों को मशीनें मिलीं. मंत्री ने कहा कि जब केंद्र पैसा देता है, तो यह सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है कि लाभ असली किसानों तक पहुंचे और इसके लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी है.

कृषि में सुधार के लिए रोडमैप पेश

दरअसल, दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये बातें कहीं. इस दौरान उन्होंने किसानों के लिए नए सुधारों का रोडमैप पेश किया. उन्होंने कहा कि अब किसान के पैसों को रोककर रखने की पुरानी प्रणाली नहीं चलेगी. एमएसपी खरीदी, केसीसी लोन, पेस्टिसाइड लाइसेंस  और केवीके की गतिविधियों में अब पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी. इन बदलावों का लक्ष्य खेती और किसान को ‘विकसित कृषि- आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में आगे बढ़ाना है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कीटनाशकों की गुणवत्ता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर कहा कि मौजूदा प्रणाली लंबी और जटिल है, जिससे ईमानदार कंपनियों को भी परेशानी होती है और किसान तक अच्छे उत्पाद पहुंचने में देरी होती है. उन्होंने कहा कि पेस्टिसाइड लाइसेंस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर काम किया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद जल्दी बाजार में आए और घटिया या नकली उत्पादों पर सख्त रोक लगे.

75 फीसदी छोटे किसानों को केसीसी लोन का लाभ मिल रहा है

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इसे जिले की एक सशक्त इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अनुसंधान और किसान तक नई तकनीक और मॉडल गांव- गांव पहुंचाने का सेतु बने. उन्होंने केवीके की संरचनात्मक मजबूती और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण सुधार बताया. मंत्री ने कहा कि लगभग 75 फीसदी छोटे किसानों को केसीसी लोन का लाभ मिल रहा है, जिसमें प्रभावी 4 फीसदी ब्याज दर पर सस्ता ऋण उपलब्ध है, लेकिन देरी अस्वीकार्य है.

बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से शिवराज की खास अपील

उन्होंने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े ऋण समय पर और बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के जारी किए जाएं, ताकि किसान साहूकारों पर निर्भर न रहें. वहीं, एमएसपी पर खरीदी  के बारे में उन्होंने कहा कि वर्तमान तीन महीने की समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि किसान फसल इतनी देर तक नहीं रोक सकता. उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि एमएसपी पर खरीद एक महीने के भीतर पूरी हो, ताकि किसान को तुरंत उचित दाम मिले और कोई अनुचित लाभ न उठा सके.

 

 

 

 

 

Published: 25 Feb, 2026 | 03:17 PM

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