दिल्ली में खेती होगी पूरी तरह डिजिटल, जमीन से लेकर किसान तक बनेगा पूरा ऑनलाइन रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा है कि इस कदम का मकसद किसानों को उनकी जमीन, फसल और सरकारी योजनाओं का सही और पारदर्शी लाभ दिलाना है. अब मुआवजा, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सब्सिडी जैसी योजनाओं में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.

नई दिल्ली | Updated On: 15 Dec, 2025 | 11:46 AM

दिल्ली में खेती करने वाले किसानों के लिए आने वाला समय बड़ी राहत और भरोसे का संकेत दे रहा है. राजधानी में पहली बार खेती से जुड़े हर रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल करने की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा है कि इस कदम का मकसद किसानों को उनकी जमीन, फसल और सरकारी योजनाओं का सही और पारदर्शी लाभ दिलाना है. अब मुआवजा, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सब्सिडी जैसी योजनाओं में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.

किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, दिल्ली में किसानों का एक डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा, जिसमें हर किसान की अलग डिजिटल पहचान होगी. इसके साथ ही खेती की जमीन का जियो-मैप्ड रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. यानी किस किसान के पास कितनी जमीन है, कहां फसल बोई गई है और उसकी स्थिति क्या है यह सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज होगी. इससे किसानों को बार-बार कागजात लेकर दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

केंद्र सरकार की योजना से मिलेगा फंड

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा डेटाबेस केंद्र सरकार की “राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता” यानी SASCI योजना के तहत तैयार किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक मदद देती है, लेकिन यह मदद एक साथ नहीं मिलेगी. तय लक्ष्य पूरे होने पर चरणबद्ध तरीके से फंड जारी किया जाएगा. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि काम समय पर और सही तरीके से पूरा हो.

फसल बीमा और मुआवजे में खत्म होगी गड़बड़ी

अब तक कई बार यह शिकायत सामने आती रही है कि गलत जमीन रिकॉर्ड, फर्जी दस्तावेज या अधूरी जानकारी के कारण किसानों को फसल बीमा, मुआवजा या सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाता. डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद ऐसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था फर्जी दावों, गलत क्षेत्रफल और नकली दस्तावेजों जैसी परेशानियों को खत्म करेगी.

मैनुअल गिरदावरी की जगह डिजिटल सर्वे

दिल्ली में पहली बार परंपरागत मैनुअल गिरदावरी की जगह डिजिटल क्रॉप सर्वे किया जाएगा. इसका मतलब है कि खेतों की जांच अब मोबाइल, फोटो और सैटेलाइट मैप के जरिए होगी. हर खेत की लोकेशन दर्ज की जाएगी, फसल की तस्वीर ली जाएगी और उसे सैटेलाइट मैप से जोड़ा जाएगा. इससे हर खेत का एक प्रमाणिक और जांच योग्य रिकॉर्ड तैयार होगा.

हर खेत का होगा सटीक रिकॉर्ड

सरकारी बयान के मुताबिक, दिल्ली की हर कृषि भूमि को जियो-रेफरेंस किया जाएगा. प्रत्येक खेत को लगभग 20 मीटर की सटीकता के साथ रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा. इससे यह साफ रहेगा कि कौन सा खेत कहां है और उसमें कौन सी फसल उगाई जा रही है. भविष्य में किसी भी योजना का लाभ देते समय यही रिकॉर्ड आधार बनेगा.

राजस्व विभाग संभालेगा जिम्मेदारी

इस पूरी परियोजना की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार ने राजस्व विभाग को सौंपी है. इसके साथ ही एक विशेष प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट बनाई जाएगी, जो काम की निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी तरह की देरी न हो. समय पर लक्ष्य पूरे होने से केंद्र से मिलने वाला फंड भी समय पर जारी हो सकेगा.

किसानों के अधिकार और भरोसे की पहल

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह योजना सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अधिकार, पहचान और पारदर्शिता देने की एक मजबूत पहल है. डिजिटल रिकॉर्ड से किसान खुद भी अपनी जमीन और फसल की जानकारी देख सकेंगे. सरकार को भरोसा है कि इससे दिल्ली में खेती से जुड़ी योजनाएं ज्यादा प्रभावी होंगी और किसानों का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होगा.

Published: 15 Dec, 2025 | 11:44 AM

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