e-NAM से जुड़कर बदली जम्मू-कश्मीर की खेती, अब देशभर की मंडियों तक पहुंच रही उपज
जम्मू-कश्मीर में ई-नाम का दायरा लगातार बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां 2021-22 में ई-नाम के जरिए सिर्फ 89 लाख रुपये का व्यापार हुआ था, वहीं 2023 तक यह बढ़कर 32 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. ह बढ़ोतरी दिखाती है कि किसान और व्यापारी तेजी से इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना रहे हैं.
e-NAM Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान अपनी उपज केवल स्थानीय मंडियों तक ही बेच पाते थे, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से उनकी फसल देश के दूसरे राज्यों तक पहुंच रही है. केंद्र सरकार की ई-नाम (National Agriculture Market) योजना ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है. इससे किसानों को बेहतर बाजार, सही कीमत और पारदर्शी व्यापार का मौका मिल रहा है.
डिजिटल मंडी से देशभर में खुला बाजार
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, ई-नाम प्लेटफॉर्म के जरिए जम्मू-कश्मीर अब राष्ट्रीय कृषि बाजार से सीधे जुड़ गया है. इसका एक बड़ा उदाहरण अगस्त 2025 में देखने को मिला, जब कश्मीर घाटी से 11 टन सेब और नाशपाती की खेप महाराष्ट्र के पुणे स्थित गुलटेकड़ी एपीएमसी मंडी तक पहुंची. यह पहली बार था जब जम्मू-कश्मीर से किसी अन्य राज्य में इस तरह डिजिटल माध्यम से व्यापार हुआ. इससे यह साफ हो गया कि अब किसान केवल अपने राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभर के खरीदारों तक उनकी पहुंच बन रही है.
तेजी से बढ़ा ई-नाम का कारोबार
जम्मू-कश्मीर में ई-नाम का दायरा लगातार बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां 2021-22 में ई-नाम के जरिए सिर्फ 89 लाख रुपये का व्यापार हुआ था, वहीं 2023 तक यह बढ़कर 32 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि किसान और व्यापारी तेजी से इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना रहे हैं.
फरवरी 2026 तक करीब 2.9 लाख टन कृषि उपज का व्यापार ई-नाम के जरिए किया जा चुका है. इसके साथ ही 52,000 से ज्यादा किसान इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है.
जम्मू-कश्मीर में ई-नाम प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को नया बाजार मिल रहा है
मंडियों को भी मिल रहा आधुनिक रूप
जम्मू-कश्मीर में अब तक 17 मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जा चुका है. इन मंडियों के जरिए कुल 1,736 करोड़ रुपये का व्यापार हो चुका है. इससे न सिर्फ व्यापार बढ़ा है, बल्कि मंडियों में भी आधुनिक सुविधाएं विकसित हुई हैं.
सरकार हर मंडी को मजबूत बनाने के लिए 75 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दे रही है. इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, ग्रेडिंग-पैकेजिंग यूनिट, क्वालिटी टेस्टिंग लैब और डिजिटल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
गुणवत्ता पर भी दिया जा रहा जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा उत्पादन ही नहीं, बल्कि अच्छी गुणवत्ता भी जरूरी है. कश्मीर के फल व्यापारी मोहम्मद अशरफ के अनुसार, अगर सेब और अन्य फलों की सही ग्रेडिंग और पैकेजिंग की जाए, तो उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं और खरीदारों का भरोसा भी बढ़ेगा.
इससे यह साफ है कि ई-नाम सिर्फ व्यापार बढ़ाने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह किसानों को बेहतर गुणवत्ता और पेशेवर खेती की ओर भी प्रेरित कर रहा है.
पूरे देश में डिजिटल कृषि व्यापार का हाल
ई-नाम की शुरुआत 2016 में हुई थी और आज यह देशभर में तेजी से फैल चुका है. फरवरी 2026 तक देश की 1,656 मंडियां इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं. करीब 1.8 करोड़ किसान और 2.72 लाख व्यापारी इसका हिस्सा बन चुके हैं.
अब तक ई-नाम के जरिए 13 करोड़ टन से ज्यादा कृषि उपज का व्यापार हो चुका है, जिसकी कुल कीमत 4.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. यह आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल कृषि बाजार देश में तेजी से मजबूत हो रहा है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत हुआ कृषि व्यापार, करोड़ों किसान जुड़े
किसानों के लिए नए अवसर
जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए यह बदलाव काफी अहम है. अब उन्हें अपनी उपज के लिए सीमित बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. वे देशभर में जहां बेहतर कीमत मिले, वहां अपनी फसल बेच सकते हैं.
इससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है और उन्हें सही दाम मिलने की संभावना भी मजबूत हुई है. साथ ही डिजिटल भुगतान की सुविधा से लेन-देन भी आसान और सुरक्षित हो गया है.
आगे और मजबूत होगा सिस्टम
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में ई-नाम को और मजबूत किया जाएगा. खासतौर पर बागवानी उत्पादों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिटी सुधार पर ध्यान दिया जाएगा.