यूएस ट्रेड डील के खिलाफ चंडीगढ़ में जुटे 100 संगठनों के किसान लीडर, सरकार को खुली चेतावनी दी

Farmer Unions Unite Against US Trade Deal: राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के उत्तर प्रदेश सचिव कैलाश सिंह लांबा ने किसान इंडिया को बताया कि अमेरिका से हो रही ट्रेड डील से कृषि उत्पादों को बाहर करवाने के लिए चंडीगढ़ में देशभर के 100 से अधिक बड़े किसान संगठनों ने आंदोलन की रणनीति पर मंथन किया है और सरकार को चेतावनी दी है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 25 Jun, 2026 | 04:40 PM

US India Trade Deal: भारत अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में देशभर के विभिन्न किसान संगठनों ने अपनी दूरियां और मतभेद खत्म कर एक मंच पर जुट गए हैं. 3 कृषि कानूनों के विरोध में 2020 में आंदोलन करने वाले किसान नेता बाद में मतभिन्नता के चलते अलग हो गए थे और नतीजे में कई संगठन बन गए थे. आज चंडीगढ़ के किसान भवन में हुई मीटिंग में सरवन सिंह पंढेर, गुरनाम सिंह चढूनी, अभिमन्यु कोहाड़, वीएम सिंह समेत राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों के 100 से ज्यादा किसान संगठनों के प्रमुख नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है. किसान नेताओं ने केंद्र को व्यापार समझौते पर खुली बैठक का प्रस्ताव दिया है.

अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ आंदोलन पर एकजुट हुए किसान संगठन

किसान मजदूर मोर्चा पंजाब के आह्वान पर चंडीगढ़ में देशभर के किसान संगठनों के नेता इकट्ठा हुए हैं. बैठक में सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्र सरकार भारत अमेरिका व्यापार समझौते को तुरंत रद्द करे. उन्होंने कहा कि देशभर के किसान संगठनों ने समर्थन दिया है और एक मंच पर आंदोलन करने पर सहमति दी है.

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के उत्तर प्रदेश सचिव कैलाश सिंह लांबा ने किसान इंडिया को बताया कि आज 25 जून 2026 को किसान भवन चंडीगढ़ में अमेरिका से हो रही ट्रेड डील से कृषि उत्पादों को बाहर करवाने के लिए देश भर के 100 से अधिक बड़े किसान संगठन के साथ आंदोलन की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया है.

कई किसान संगठनों का एक मुख्य मंच बनाने को मंजूरी

पंजाब में मुख्य रूप से सक्रिय किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर, भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के नेता अभिमन्यु कोहाड़, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रमुख सरदार वीएम सिंह, भाकियू चढूनी के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी समेत दो दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों के प्रमुख नेताओं ने एकजुटता दिखाई है और बैठक में एक मंच बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.

तीन काले कृषि कानूनों वाली गलती फिर दोहरा रही मोदी सरकार

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार एक बार फिर वही गलती दोहरा रही है जो उसने पहले तीन विवादास्पद कृषि कानून लाते समय की थी. उस समय भी, कृषि से जुड़े हितधारकों, किसान संगठनों या अन्य प्रभावित वर्गों के साथ कोई बातचीत नहीं की गई थी. अभी भी डेयरी फार्मिंग, खेती, छोटे व्यापारियों या उन सभी वर्गों से कोई चर्चा नहीं की गई है जिनकी आजीविका इस समझौते से सीधे प्रभावित होगी. सरकार मनमाने तरीके से समझौते कर रही है. वह यह भी नहीं देख रही है कि किसानों और कृषि क्षेत्र को कितना बड़ा नुकसान होगा.

86 फीसदी किसान छोटे हैं, फैसले से भारी नुकसान झेलेंगे

नेताओं ने कहा कि अगर अमेरिका को भारत के कृषि बाजार तक बिना रोक-टोक पहुंच मिल जाती है, तो भारतीय किसानों के लिए मुकाबला करना लगभग असंभव हो जाएगा. अमेरिका में किसानों को बड़े पैमाने पर सालाना सरकारी सब्सिडी मिलती है. वहां खेती बहुत ज्यादा मशीनीकृत है और बड़े जमीनी हिस्सों पर आधारित है. दूसरी ओर भारत में खासकर पंजाब में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे जमींदार हैं, जिनमें से ज्यादातर के पास पांच एकड़ या उससे कम जमीन है.  किसानों को पहले से ही अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है, कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और किसानों की आत्महत्याएं लगातार हो रही हैं. ऐसे हालात में यह समझौता “भेड़ के बच्चे को शेर के सामने फेंकने” जैसा होगा.

किसान संगठनों ने केंद्र को खुली बैठक का प्रस्ताव दिया

किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिकी समझौते के बाद कृषि उत्पाद, दालें, फल, सब्ज़ियां और कई अन्य खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर भारतीय बाजारों में डंप किए जाएंगे. इससे भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और किसानों की आय और कम हो जाएगी. नेताओं ने कहा कि अगर मोदी सरकार यह दावा करती है कि यह समझौता किसानों के हित में है, तो सरकार को तुरंत देश के सभी किसान संगठनों के साथ एक खुली बैठक बुलानी चाहिए. इस बैठक का मीडिया के सामने लाइव प्रसारण होना चाहिए, जहां सरकार अपनी बात रख सके और किसान नेता अपनी बात रख सकें. तब देश की जनता खुद तय कर सकेगी कि यह समझौता असल में किसके हित में है.

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Published: 25 Jun, 2026 | 04:06 PM

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