India US Trade Deal: भारत अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में देशभर की किसान यूनियनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार समेत देशभर के कई राज्यों और शहरों में विभिन्न किसान यूनियनों के नेतृत्व में दिल्ली, राज्यों की राजधानी और जिलों के प्रशासनिक परिसरों में किसान जुटे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 22 किसान संगठनों का दल दिल्ली के जंतर मंतर में विरोध प्रदर्शन करने पहुंचा है. किसान नेता राकेश टिकैत, जगजीत सिंह डल्लेवाल, सरवन सिंह पंढेर ने किसानों के हितों की अनदेखी नहीं करने की चेतावनी सरकार को दी है और अन्याय करने की दिशा मे देशव्यापी आंदोलन करने के संकेत दिए हैं.
पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर की वार्ता शुरू
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने आज मंगलवार को दिल्ली में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत शुरू की है. सरकार का कहना है कि इस व्यापार समझौते में भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार हासिल होगा, जिससे अधिक कीमत मिलने के साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और इकनॉमी को फायदा मिलेगा.
व्यापार समझौते का विरोध क्यों कर रहे किसान संगठन
भारत अमेरिका व्यापार समझौते का किसान संगठन इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आ जाएंगे. इससे घरेलू डेयरी उत्पादों की कीमतें गिरेंगी और छोटे किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा. जबकि, भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था भी खतरे में पड़ने का डर किसानों को सता रहा है. किसान संगठनों का कहना है कि सेब से लेकर संतरा, अंगूर, दूध, घी, पनीर, पशु चारा, शराब समेत कई तरह के अन्य उत्पाद अमेरिका से सस्ती दरों में आएंगे तो घरेलू किसानों को अपने उत्पादों की कीमत नहीं मिलेगी और पहले से आर्थिक चोट खा रहे किसान बर्बाद हो जाएंगे.
डल्लेवाल की चेतावनी- किसानों को फिर से आंदोलन के लिए बाध्य न करे सरकार
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि भारत-अमेरिका के मध्य व्यापार समझौते से देश के किसानों की कमर तोड़ने का काम किया जा रहा है. समझौते के फ्रेमवर्क पर भारत-अमेरिका के मध्य हस्ताक्षर हुए थे जिसके तहत बहुत बड़े दायरे में अमेरिका से खाद्य एवम कृषि उत्पाद भारत मंगवाने की बात कही गयी थी, अब इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो भारत के कृषि, पोल्ट्री एवम डेयरी क्षेत्रों को बहुत बड़ा नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि आज G20 के जरिए सूखे मेवे (dry fruit) उगाने वाले किसानों पर गाज गिरी है और कल गेहूं पर आयात शुल्क (import duty) खत्म करके गेहूं उगाने वाले किसानों पर भी यही गाज गिरेगी. डल्लेवाल ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि किसानों के हितों के विपरीत समझौता किया गया तो किसान फिर से आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

दिल्ली के जंतर-मंतर में धरना देते एसकेएम गैर राजनीतिक के किसान.
अमेरिका ट्रेड डील देश को गुलाम बनाने वाला समझौता – राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान केवल अन्न नहीं उगाता,वह देश की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करता है. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, सस्ती खाद-बीज और आर्थिक सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है. लेकिन, अमेरिका के साथ समझौता करके भारतीय किसानों को बर्बाद करने की साजिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील देश को गुलाम बनाने वाला समझौता, किसान हितों की अनदेखी हुई तो होगा आंदोलन. उन्होंने कहा किकिसानों के पास एक ही रास्ता है आंदोलन, अगर आंदोलन नहीं होगा तो जमीन, फसल और नस्ल खो देंगे.
समझौते से देश में गंभीर आर्थिक संकट पैदा होने का खतरा – सरवन सिंह पंढेर
किसान मजदूर मोर्चा पंजाब चैप्टर के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा और बुनियादी क्षेत्र है. अगर यह US-भारत समझौता लागू होता है, तो इससे कृषि क्षेत्र समेत देश के कई अन्य क्षेत्रों को भारी नुकसान होगा. इससे किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों की आजीविका पर सीधा हमला होगा और देश में गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा कि US-भारत व्यापार समझौते के खिलाफ आज से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.