Cotton Import Duty Exemption: देश के कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास (कॉटन) के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटा दिया जाएगा. फिलहाल कपास के आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगता है. सरकार का मानना है कि इस कदम से कपड़ा उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिलेगा, उत्पादन लागत कम होगी और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे.
हालांकि, इस फैसले के बाद किसानों के हितों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सरकार का कहना है कि किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी.
कपास आयात पर क्यों हटाई गई ड्यूटी?
सरकार का कहना है कि कपड़ा और गारमेंट उद्योग को अच्छी क्वालिटी वाली कपास की लगातार जरूरत होती है. कई बार देश में होने वाला कपास उत्पादन उद्योग की मांग को पूरा नहीं कर पाता, जिससे कपास की कमी हो जाती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने पांच महीने के लिए कपास के आयात पर लगने वाला शुल्क हटा दिया है. इससे कंपनियां विदेशों से कम कीमत पर क्वालिटी कपास खरीद सकेंगी और कपड़ा उत्पादन में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
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कपड़ा उद्योग को कैसे मिलेगा फायदा?
आयात शुल्क हटने से सूत (यार्न), कपड़ा (फैब्रिक), रेडीमेड कपड़े और अन्य टेक्सटाइल उत्पाद बनाने की लागत कम हो सकती है. जब उद्योगों को सस्ती और अच्छी क्वालिटी की कपास मिलेगी, तो उनका खर्च भी घटेगा. इससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे. इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) और निर्यात करने वाली कंपनियों को मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि सस्ती और अच्छी क्वालिटी की कपास मिलने से निर्यात ऑर्डर बढ़ सकते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है यह क्षेत्र
टेक्सटाइल और परिधान उद्योग भारत में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है. इस सेक्टर से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 4.5 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है. अगर उद्योगों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में कपास जैसी कच्ची सामग्री मिलती रहे, तो उत्पादन बिना रुकावट चलता रहता है और रोजगार भी सुरक्षित रहते हैं. सरकार का मानना है कि यह फैसला टेक्सटाइल उद्योग में निवेश बढ़ाने, उत्पादन को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद करेगा.
किसानों के हितों की सुरक्षा का भरोसा
कपास आयात पर शुल्क हटाने के बावजूद सरकार ने किसानों के हित सुरक्षित रहने का दावा किया है. इसके लिए भारतीय कपास निगम (CCI) के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था लागू है.
सरकार के मुताबिक, एमएसपी किसानों को उनकी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक मूल्य सुनिश्चित करता है. हाल ही में 2026-27 सीजन के लिए कपास के एमएसपी में 557 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी की गई है.
नई दरों के अनुसार:
| कपास का प्रकार | नया MSP (रुपये/क्विंटल) |
|---|---|
| मध्यम रेशा कपास | 8,267 |
| लंबा रेशा कपास | 8,667 |
क्या घरेलू किसानों को होगा नुकसान?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि विदेशों से मंगाई जाने वाली कपास का इस्तेमाल आमतौर पर खास औद्योगिक जरूरतों और निर्यात से जुड़े ऑर्डरों को पूरा करने के लिए किया जाता है. यह कपास सीधे तौर पर देश में पैदा होने वाली कपास की जगह नहीं लेती. इसके अलावा, आयात ज्यादातर तब किया जाता है जब घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता कम होती है. इसलिए सरकार का मानना है कि इस फैसले का किसानों और घरेलू कपास खरीद पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है.