ब्रज की लट्ठमार से पंजाब के होला मोहल्ला तक, ऐसे मनाई जाती है देशभर में होली

होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत, आपसी प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक है. दिलचस्प बात यह है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में होली मनाने का अंदाज भी अलग है. कहीं रंगों की बारिश होती है, तो कहीं भक्ति और संगीत की स्वर लहरियां गूंजती हैं.

नई दिल्ली | Published: 19 Feb, 2026 | 10:06 AM

Holi 2026: भारत सच में त्योहारों की धरती है. यहां हर मौसम, हर अवसर और हर भावना को किसी न किसी पर्व के जरिए मनाया जाता है. इन्हीं त्योहारों में होली सबसे रंगीन, सबसे जीवंत और सबसे खुशियों से भरा पर्व माना जाता है. होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत, आपसी प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक है. दिलचस्प बात यह है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में होली मनाने का अंदाज भी अलग है. कहीं रंगों की बारिश होती है, तो कहीं भक्ति और संगीत की स्वर लहरियां गूंजती हैं. आइए जानते हैं देश के विभिन्न राज्यों में होली किस तरह मनाई जाती है.

ब्रज की लट्ठमार होली: प्रेम और परंपरा का अनोखा संगम

उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है. यहां होली का उत्सव कई दिनों तक चलता है. बरसाना की लट्ठमार होली विशेष आकर्षण का केंद्र होती है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने मित्रों के साथ राधा के गांव बरसाना आए थे और वहां उन्होंने गोपियों से हंसी-मजाक किया. उसी परंपरा को निभाते हुए आज भी महिलाएं पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं. पूरा वातावरण राधा-कृष्ण के भजनों और रंगों से सराबोर रहता है.

कानपुर का गंगा मेला: आजादी की याद के साथ रंगोत्सव

उत्तर प्रदेश के कानपुर में होली के बाद गंगा मेला मनाया जाता है. यह मेला स्वतंत्रता सेनानियों की याद से जुड़ा हुआ है. होली के कई दिन बाद भी यहां रंग खेलने की परंपरा जारी रहती है. हजारों लोग गंगा किनारे इकट्ठा होकर जश्न मनाते हैं. यह उत्सव केवल रंगों तक सीमित नहीं, बल्कि देशभक्ति और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है.

बिहार और झारखंड की फगुआ: गीत-संगीत की महक

बिहार और झारखंड में होली को फगुआ कहा जाता है. यहां होली के मौके पर पारंपरिक फगुआ गीत गाए जाते हैं. ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की धुन पर लोग झूमते हैं. गांवों में सामूहिक होलिका दहन होता है और अगले दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं. ठंडाई और पकवानों के साथ यह पर्व पूरे उत्साह से मनाया जाता है.

पंजाब का होला मोहल्ला: शौर्य और साहस की मिसाल

पंजाब में सिख समुदाय होली के अगले दिन होला मोहल्ला मनाता है. आनंदपुर साहिब में इसका भव्य आयोजन होता है. यहां पारंपरिक युद्ध कला, घुड़सवारी और तलवारबाजी के प्रदर्शन किए जाते हैं. यह पर्व सिख परंपरा में साहस और वीरता का प्रतीक है.

पश्चिम बंगाल की डोल यात्रा: भक्ति और सौंदर्य का मेल

पश्चिम बंगाल में होली को डोल यात्रा के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण और राधा की प्रतिमा को सजी-धजी पालकी में नगर भ्रमण कराया जाता है. महिलाएं पीले वस्त्र पहनती हैं और अबीर-गुलाल उड़ाते हुए कीर्तन करती हैं. शांतिनिकेतन में बसंत उत्सव भी इसी अवसर पर मनाया जाता है.

राजस्थान की शाही होली: परंपरा और वैभव का रंग

राजस्थान में होली राजसी अंदाज में मनाई जाती है. जयपुर और उदयपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं. राजपरिवारों की मौजूदगी में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य और शाही जुलूस निकाले जाते हैं. हाथियों और घोड़ों की सजीव झांकियां इस पर्व को और खास बनाती हैं.

उत्तराखंड की बैठकी होली: संगीत की सुरमयी परंपरा

उत्तराखंड में होली को बैठकी, खड़ी और महिला होली के रूप में मनाया जाता है. यहां शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गीत गाए जाते हैं. लोग पारंपरिक वेशभूषा में बैठकर सामूहिक गायन करते हैं. यह होली रंगों से ज्यादा संगीत और भक्ति पर केंद्रित होती है.

मणिपुर की याओसांग: पांच दिन का उत्सव

मणिपुर में होली को याओसांग कहा जाता है और यह पांच दिनों तक चलता है. यहां थाबल चोंगबा नामक पारंपरिक नृत्य किया जाता है. पूरा राज्य रंगों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठता है.

तमिलनाडु की कामन पंडिगई और गोवा की शिमगो

तमिलनाडु में होली को कामन पंडिगई के रूप में मनाया जाता है, जो कामदेव से जुड़ी कथा पर आधारित है. वहीं गोवा में शिमगो के नाम से यह पर्व मनाया जाता है, जिसमें लोकनृत्य और झांकियां प्रमुख आकर्षण होते हैं.

इस तरह देखा जाए तो होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत उदाहरण है. अलग-अलग परंपराओं के बावजूद एक बात सबमें समान है खुशियां बांटना और रिश्तों को मजबूत करना. यही होली की असली पहचान है.

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