ICAR-IARI ने QS रैंकिंग 2026 में पहली बार बनाई जगह, वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी उपलब्धि

IARI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां होने वाला शोध सीधे किसानों तक पहुंचता है. यह सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों में काम आने वाली तकनीकों पर फोकस करता है. देश में हरित क्रांति से लेकर आज तक कई बड़े कृषि बदलावों में IARI का योगदान रहा है.

नई दिल्ली | Published: 27 Mar, 2026 | 08:17 AM

ICAR IARI QS ranking 2026: भारत के कृषि क्षेत्र के लिए यह सच में गर्व का पल है. देश का जाना-माना संस्थान ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI) पहली बार दुनिया की प्रतिष्ठित QS World University Rankings 2026 में शामिल हुआ है. यह उपलब्धि सिर्फ एक संस्थान की सफलता नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि भारत का कृषि अनुसंधान और शिक्षा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना रहा है.

करीब 121 साल पुराने इस संस्थान ने “एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री” विषय में 151–200 की रैंक हासिल की है. खास बात यह है कि इस श्रेणी में भारत के सिर्फ चार ही संस्थानों को जगह मिली है. इससे साफ है कि IARI अब दुनिया के बड़े संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है.

देश के टॉप संस्थानों में बनी खास पहचान

IARI का इस रैंकिंग में आना इसलिए भी खास है क्योंकि इसके साथ जिन संस्थानों को जगह मिली है, वे देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय हैं. इसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, आईआईटी खड़गपुर और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इससे यह साफ होता है कि IARI अब सिर्फ कृषि संस्थान नहीं रहा, बल्कि यह बहु-विषयक शिक्षा और शोध में भी मजबूत स्थान बना चुका है.

QS रैंकिंग क्यों मानी जाती है खास?

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग दुनिया की सबसे भरोसेमंद रैंकिंग में से एक है. इसमें विश्वविद्यालयों को कई महत्वपूर्ण मानकों पर परखा जाता है. जैसे..पढ़ाई की गुणवत्ता, संस्थान की प्रतिष्ठा, छात्रों को मिलने वाले रोजगार के अवसर, शोध कार्यों का असर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग. IARI का इस रैंकिंग में शामिल होना यह दिखाता है कि वह इन सभी क्षेत्रों में लगातार अच्छा काम कर रहा है.

खेत से जुड़ा शोध, यही है IARI की ताकत

IARI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां होने वाला शोध सीधे किसानों तक पहुंचता है. यह सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों में काम आने वाली तकनीकों पर फोकस करता है. देश में हरित क्रांति से लेकर आज तक कई बड़े कृषि बदलावों में IARI का योगदान रहा है. बेहतर बीज, नई खेती तकनीक और जलवायु के हिसाब से खेती के तरीके इन सबमें इस संस्थान की अहम भूमिका रही है.

युवाओं को बना रहा भविष्य के कृषि विशेषज्ञ

IARI केवल शोध करने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि यह देश के लिए कुशल कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी तैयार करता है. यहां से पढ़े छात्र आज देश और विदेश में अहम पदों पर काम कर रहे हैं. जब देश “विकसित भारत” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसे संस्थानों की भूमिका और भी अहम हो जाती है, जो युवाओं को सही दिशा और ज्ञान दे सकें.

सरकार भी दे रही है पूरा जोर

इस उपलब्धि पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) और ICAR के महानिदेशक एम.एल जाट ने कहा कि देश में कृषि शिक्षा को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि ICAR लगातार ऐसे मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक, बेहतर रिसर्च और वैश्विक स्तर की शिक्षा शामिल हो. सरकार अब सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती और नई तकनीकों को अपनाने पर भी ध्यान दे रही है.

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही भारत की ताकत

आज के समय में कृषि विज्ञान तेजी से बदल रहा है और इसमें प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है. ऐसे में किसी भारतीय संस्थान का QS रैंकिंग में शामिल होना बहुत बड़ी उपलब्धि है. IARI ने यह साबित कर दिया है कि भारत सिर्फ खेती करने वाला देश नहीं, बल्कि कृषि विज्ञान और नवाचार में भी दुनिया को दिशा दे सकता है.

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ देश के किसानों को मिलेगा. बेहतर शोध और नई तकनीकों की मदद से किसानों को ज्यादा उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत में खेती करने का मौका मिलेगा. जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में भी IARI की भूमिका बेहद अहम है.

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