जल संकट की ओर बढ़ रहा देश? रिपोर्ट में सामने आई बड़े बांधों की चिंताजनक तस्वीर

CWC Report: सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि देश के 166 जलाशयों में से 92 जलाशयों में उनकी क्षमता के 40 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. इसका सीधा असर गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है. खासतौर पर उन इलाकों में जहां पहले से ही पानी की कमी रहती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 9 May, 2026 | 02:04 PM

CWC Report: देश में गर्मी बढ़ने के साथ पानी का संकट भी गहराता दिखाई दे रहा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार देश के चार प्रमुख जलाशय क्षेत्रों में से तीन क्षेत्रों के बड़े बांध आधे से ज्यादा खाली हो चुके हैं. कुल मिलाकर देश के 166 बड़े बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 36 प्रतिशत पानी ही बचा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई राज्यों में पीने के पानी, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है. हालांकि मौसम विभाग ने अगले सप्ताह दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

देश के बड़े बांधों में कितना पानी बचा?

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों की कुल जल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. लेकिन फिलहाल इनमें सिर्फ 66.830 BCM पानी मौजूद है. यानी कुल क्षमता का लगभग 36 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है. हालांकि यह स्थिति पिछले साल की तुलना में कुछ बेहतर बताई जा रही है. पिछले वर्ष इसी समय जल स्तर और कम था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौजूदा जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत से लगभग 25 प्रतिशत अधिक है. इसके बावजूद कई क्षेत्रों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं.

आधे से ज्यादा जलाशयों में 40 प्रतिशत से कम पानी

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि देश के 166 जलाशयों में से 92 जलाशयों में उनकी क्षमता के 40 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. इसका सीधा असर गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है. खासतौर पर उन इलाकों में जहां पहले से ही पानी की कमी रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून में देरी हुई या सामान्य से कम बारिश हुई तो कई राज्यों में स्थिति और बिगड़ सकती है.

दक्षिण भारत में सबसे खराब हालत

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है. दक्षिणी क्षेत्र के 47 प्रमुख जलाशयों में केवल 27 प्रतिशत पानी बचा है. इन जलाशयों की कुल क्षमता 55.288 BCM है, लेकिन वर्तमान में इनमें सिर्फ 14.833 BCM पानी मौजूद है.

राज्यवार स्थिति देखें तो:

  • तेलंगाना में जल स्तर केवल 20 प्रतिशत है
  • कर्नाटक में 22 प्रतिशत पानी बचा है
  • केरल में 25 प्रतिशत जल भंडारण है
  • तमिलनाडु में 35 प्रतिशत पानी है
  • आंध्र प्रदेश में 38 प्रतिशत जल स्तर दर्ज किया गया है

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में बढ़ती गर्मी और कम बारिश की वजह से जलाशयों का स्तर तेजी से गिरा है.

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा चिंता

पूर्वी भारत की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है. पूर्वी क्षेत्र के 27 जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 33.5 प्रतिशत पानी मौजूद है. लेकिन पश्चिम बंगाल की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के जलाशयों में केवल 12 प्रतिशत पानी बचा है. यह स्तर बेहद कम माना जा रहा है. अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो कई इलाकों में पानी की समस्या गंभीर हो सकती है.

उत्तर भारत की स्थिति थोड़ी बेहतर

उत्तर भारत के 11 प्रमुख जलाशयों में फिलहाल 42 प्रतिशत पानी मौजूद है. इनकी कुल क्षमता 19.836 BCM है, जिसमें अभी 8.353 BCM पानी बचा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार यह स्तर पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है. इसलिए उत्तर भारत की स्थिति फिलहाल अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी बेहतर मानी जा रही है.

पश्चिम और मध्य भारत का हाल

पश्चिम भारत के 53 जलाशयों में कुल क्षमता का 35 प्रतिशत पानी मौजूद है. वहीं मध्य भारत के 28 जलाशयों में 41.5 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी के कारण आने वाले हफ्तों में जल स्तर और तेजी से गिर सकता है.

बारिश की कमी ने बढ़ाई परेशानी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 7 मई के बीच देश के 725 जिलों में से करीब 28 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई. इससे पहले जनवरी और फरवरी में भी देश के 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी. कम बारिश की वजह से नदियों, तालाबों और बांधों में पानी का स्तर तेजी से गिरा है.

किसानों की बढ़ सकती है मुश्किल

जलाशयों में पानी कम होने का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है. कई राज्यों में धान, गन्ना, कपास और दूसरी फसलों की बुवाई जल्द शुरू होने वाली है. ऐसे में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला तो खेती प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में नहरों और बांधों पर निर्भर खेती होती है, वहां किसान ज्यादा मुश्किल में आ सकते हैं.

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