झारखंडी आम की दुबई में धूम, आदिवासी महिला किसानों की मेहनत रंग लाई, 180 फीसदी बढ़ी कमाई

Jharkhand Amrapali Mango: झारखंड के गुमला और देवघर जिले में महिला और आदिवासी किसानों द्वारा उगाए गए 2 मीट्रिक टन अम्रपाली आम पहली बार दुबई भेजे गए हैं. यह निर्यात एपीडा की मदद से किया गया. खास बात यह रही कि किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में करीब 180 फीसदी अधिक कीमत मिली.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 7 Jul, 2026 | 07:06 PM

Amrapali Mango Export: झारखंड के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. राज्य के गुमला और देवघर में उगाए गए मशहूर अम्रपाली आम अब पहली बार दुबई के बाजार तक पहुंच गए हैं. 3 जुलाई 2026 को करीब 2 मीट्रिक टन आम दुबई भेजे गए. इस निर्यात में एपीडा (APEDA) ने अहम भूमिका निभाई. सबसे खास बात यह है कि, ये आम किसी बड़ी कंपनी या फार्म से नहीं, बल्कि आदिवासी और महिला किसानों की किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) से खरीदे गए हैं. अब दुबई में ये आम लुलु स्टोर्स के जरिए ग्राहकों को मिलेंगे.

महिला किसानों की मेहनत बनी सफलता की मिसाल

इस खेप में शामिल आम तीन महिला किसान उत्पादक कंपनियों से लिए गए. इनमें गुमला जिले की एमवीएम बाघीमा पलकोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, रायडीह एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और देवघर की मोहनपुर आजीविका महिला किसान प्रोड्यूसर सोसायटी शामिल हैं.

इन बागों को बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित किया गया है. इस योजना को मनरेगा और झारखंड सरकार के सहयोग से लागू किया गया, जिससे आदिवासी महिला किसानों को बागवानी के जरिए नई पहचान मिली.

किसानों को मिला बाजार से 180 फीसदी ज्यादा दाम

इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों की आय में देखने को मिला. जिन महिला किसान उत्पादक कंपनियों ने आम बेचे, उन्हें स्थानीय मंडियों की तुलना में करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली. यानी जो आम पहले कम दाम पर बिकता था, वही अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत दिला रहा है. इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है कि अगर अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन किया जाए तो विदेशों में भी उनकी फसल की बड़ी मांग हो सकती है.

50 हजार से ज्यादा किसानों को मिलेगा फायदा

इस पहल का फायदा सिर्फ कुछ किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा. आम के इस निर्यात में शामिल तीन किसान उत्पादक कंपनियों (FPO) से 1,500 से ज्यादा किसान सदस्य जुड़े हुए हैं. ये कंपनियां मिलकर 50 हजार से अधिक किसान परिवारों का प्रतिनिधित्व करती हैं. ऐसे में इस सफलता से आने वाले समय में बड़ी संख्या में किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार मिलने और अच्छी कमाई होने की उम्मीद है.

विदेश भेजने से पहले किसानों को दी गई खास ट्रेनिंग

विदेशों में कृषि उत्पाद बेचने के लिए केवल अच्छी फसल उगाना ही काफी नहीं होता. इसके लिए क्वालिटी, पैकिंग, ग्रेडिंग और निर्यात के नियमों की जानकारी भी जरूरी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए एपीडा ने मई 2026 में गुमला जिले के पलकोट क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया. इसमें आठ किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों और निदेशकों को अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी मानकों, फसल की कटाई के बाद रखरखाव, पैकिंग और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी दी गई.

इसके अलावा सितंबर 2025 में देवघर जिले में महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें महिलाओं को निर्यात के अवसर, सरकारी सहायता योजनाओं और विदेशों में कृषि उत्पाद बेचने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई.

झारखंड की बागवानी को मिली नई पहचान

अम्रपाली आम का यह निर्यात सिर्फ एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि झारखंड की बागवानी और महिला किसानों की बढ़ती ताकत का भी प्रमाण है. इससे यह साफ हो गया है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी सहयोग और अच्छे बाजार मिलने पर छोटे और आदिवासी किसान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहुंच बना सकते हैं.

आने वाले समय में अगर इसी तरह किसानों को क्वालिटी सुधार, बाजार से जोड़ने और निर्यात की सुविधाएं मिलती रहीं, तो झारखंड के आम समेत दूसरे फल और कृषि उत्पाद भी दुनिया के कई देशों में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

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