मूंगफली बुवाई के दौरान खेत में डालें ये खाद, बढ़ जाएदी पैदावार.. बस करना होगा ये काम

मूंगफली की बेहतर पैदावार के लिए बुवाई के समय संतुलित उर्वरक प्रबंधन जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और खासतौर पर सल्फर की सही मात्रा देने से अंकुरण मजबूत होता है और फलियां अच्छी बनती हैं. थोड़ी सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है.

नोएडा | Updated On: 3 Jan, 2026 | 08:32 PM

Peanut Farming: मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में किसान बड़े स्तर पर मूंगफली की खेती करते हैं. इससे किसानों को अच्छी कमाई होती है. लेकिन कई किसानों को कहना है कि लागत के मुकाबले फायदा और उत्पादन कम हो रहा है. लेकिन ऐसे किसानों को अब चिंता करने की जरूत नहीं है. क्योंकि कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि अगर सही तकनीक और संतुलित मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल नहीं करने पर पैदावार पर असर पड़ता है. हालांकि,  बुवाई के समय छोटी-सी लापरवाही भी आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बन जाता है. तो आइए आज जानते हैं मूंगफली की बुवाई के दौरान किन बातों का खयाल रखना चाहिए.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी के साथ उर्वरक प्रबंधन  बेहद जरूरी है. अगर बुवाई के समय खाद की मात्रा संतुलित नहीं होगी, तो अंकुरण कमजोर रहेगा. कमजोर अंकुरण का असर पौधों की संख्या और फलियों के विकास पर पड़ता है. इसलिए किसान को अनुमान पर नहीं, बल्कि सिफारिश के अनुसार ही उर्वरक डालना चाहिए. जनवरी का महीना मूंगफली की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है, बस थोड़ी सावधानी रखना जरूरी है.

उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल है जरूरी

एक्सपर्ट के मुताबिक, मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करना जरूरी है. बुवाई के समय प्रति एकड़ 8 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस, 8 किलो पोटाश और 8 किलो सल्फर देना चाहिए. इससे पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है और आगे चलकर फलियां भरने में मदद मिलती है. मूंगफली की फसल में सल्फर की भूमिका सबसे अहम होती है. कई किसान केवल नाइट्रोजन और फास्फोरस  पर ध्यान देते हैं और सल्फर डालना भूल जाते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है. सल्फर की कमी से ऊपरी पत्तियां हल्की पीली दिखती हैं और फसल कमजोर हो जाती है.

इस मात्रा में खेत में डालें खाद

सल्फर की कमी से बचने के लिए किसानों को बुवाई के समय ही सही मात्रा में सल्फर देना चाहिए. इसके लिए बेंजोनाइट सल्फर का इस्तेमाल सबसे बेहतर है. प्रति एकड़ 10 किलो बेंजोनाइट सल्फर डालने से फसल को पर्याप्त सल्फर मिलता है, पत्तियों का रंग हरा और स्वस्थ रहता है और पौधे मजबूत बनते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित पोषण मिलने से मूंगफली  के पौधे मजबूत होते हैं, ज्यादा फूल लगते हैं और फलियां अच्छी तरह विकसित होती हैं. शुरुआत में पोषक तत्वों की कमी होने पर बाद में भरपाई करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए किसान को चाहिए कि बुवाई से पहले मिट्टी की जांच करवा लें और उसी के अनुसार उर्वरक डालें.

Published: 3 Jan, 2026 | 10:24 PM

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