सरकारी कंपनियों ने जारी नहीं की खाद.. टारगेट से 59 फीसदी कम सप्लाई, संकट में फंसे किसान

उत्तर प्रदेश को कुल 10 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन हुआ है, जिसके सापेक्ष अब तक केवल 5.37 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई है.

नोएडा | Updated On: 30 Jul, 2025 | 04:27 PM

उत्तर प्रदेश में किसान खाद नहीं मिलने से परेशान हैं, कई जिलों से लंबी-लंबी लाइनें और मारपीट के वीडियों-खबरें सामने आ चुकी हैं. सप्लाई में देरी की वजह सरकारी उर्वरक सप्लाई करने वाली कंपनियां बनी हैं. कृभको, इफको, आरसीएफ आदि सप्लायर कंपनियों ने तय लक्ष्य से 59 फीसदी कम उर्वरक सप्लाई की है, जिसकी वजह से विक्रेताओं तक समय पर खाद नहीं पहुंच सकी और किसानों को संकट झेलना पड़ा है.

हालांकि, यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि किसानों को खरीफ फसलों की रोपाई और गन्ने की खड़ी फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. प्रदेश में इस समय 9.18 लाख मीट्रिक टन यूरिया एवं 5.58 लाख मीट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक (डीएपी, एनपीके) की उपलब्धता है. यह उपलब्धता सहकारिता क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र दोनों के माध्यम से किसानों को सुलभ कराई जा रही है.

इन कंपनियों ने तय सीमा से कम उर्वरक सप्लाई की

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने राज्य के उर्वरक मैन्यूफैक्चरर्स और सप्लायर संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में बताया गया कि प्रदेश को कुल 10 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन मिला है, जिसके सापेक्ष अब तक केवल 5.37 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है, जो कि निर्धारित लक्ष्य का मात्र 59 प्रतिशत है. बैठक में पाया गया कि कुछ कंपनियों ने बहुत कम प्रतिशत में उर्वरक आपूर्ति की है. कृभको से केवल 36 प्रतिशत, इफको की ओर से 55 प्रतिशत, आरसीएफ के जरिए 63 प्रतिशत और आईपीएल की ओर केवल 8 प्रतिशत आपूर्ति की गई है.

आरसीएफ 3 दिन में 3 रैक यूरिया भेजेगा

कृषि मंत्री ने नाराजगी जताते हुए संबंधित कंपनियों को शेष आवंटन की आपूर्ति शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिये. उन्होंने कृभको को निर्देशित किया कि शेष यूरिया की आपूर्ति शाहजहांपुर संयंत्र से तत्काल प्रदेश में कराई जाए. एनएफएल ने आश्वासन दिया कि वह शेष 14122 मीट्रिक टन यूरिया इसी माह में उपलब्ध करा देगा. आरसीएफ ने जानकारी दी कि आगामी तीन दिनों में प्रदेश को तीन रैक यूरिया भेजा जाएगा, जबकि इफको ने बताया कि वह 21000 मीट्रिक टन यूरिया शीघ्र भेजने जा रही है.

1 जुलाई से 29 जुलाई के दौरान भारत सरकार की ओर यूपी के लिए कुल 176 रैक यूरिया भेजे गए, जिनमें से 151 रैक मिल चुके हैं जबकि शेष 25 रैक रास्ते में हैं, जो अगले 2 से 3 दिनों के भीतर संबंधित जिलों तक पहुंच जाएंगे.

खपत के मुकाबले आधी भी यूरिया की आपूर्ति नहीं

वर्तमान में प्रदेश में यूरिया की दैनिक खपत औसतन 48384 मीट्रिक टन है, जबकि प्रतिदिन औसतन मात्र 18187 मीट्रिक टन यूरिया की प्राप्ति हो रही है. इससे खाद स्टॉक पर असर पड़ रहा है. इस अंतर को देखते हुए प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि निजी क्षेत्र के जरिए वितरित उर्वरकों में से 50 प्रतिशत मात्रा सहकारी समितियों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि कृषकों को उनके विश्वसनीय माध्यम से उर्वरक प्राप्त हो सके.

सरकार की ओर से अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जनपदों में उर्वरकों की आपूर्ति की विशेष निगरानी की जा रही है. साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों, पोल्ट्री फीड इकाइयों और पेंट उद्योगों में टेक्निकल ग्रेड यूरिया के स्थान पर यदि अनुदानित नीम कोटेड यूरिया के उपयोग की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए.

किसान अगली फसल के लिए अभी खाद स्टॉक न करें

किसानों से अपील की गई है कि वे अपनी फसल की रोपाई व टॉप ड्रेसिंग की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों की खरीद करें. आगामी फसलों के लिए पहले से उर्वरक क्रय कर भंडारण न करें, ताकि सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध हो सके. यदि किसी कृषक को उर्वरक की ओवररेटिंग, टैगिंग, कालाबाजारी या अन्य किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है तो वह अपनी शिकायत अपने जनपद के जिलाधिकारी अथवा जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय में स्थापित नियंत्रण कक्ष में दर्ज करा सकता है. इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष, लखनऊ में स्थापित उर्वरक कंट्रोल रूम के दूरभाष संख्या 0522-2209650 पर भी शिकायत की जा सकती है.

इन शहरों में सबसे ज्यादा खाद का स्टॉक उपलब्ध

वर्तमान में मंडलवार सहकारी एवं निजी क्षेत्र में यूरिया की कुल उपलब्धता 9.18 लाख मीट्रिक टन तथा फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता 5.58 लाख मीट्रिक टन है. इनमें सर्वाधिक उपलब्धता कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ एवं बरेली मंडलों में दर्ज की गई है. राज्य सरकार भारत सरकार से निरंतर समन्वय स्थापित करते हुए खरीफ सीजन के दौरान सभी आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है. बताया गया कि नकली खाद या ओवररेटिंग रोकने के लिए जिलों और राज्यों की सीमाओं पर चौकसी बढ़ाई गई है.

Published: 30 Jul, 2025 | 04:23 PM