आम किसान अभी नहीं करें ये गलती, फूल नहीं केवल आएंगी हरी पत्तियां.. पैदावार के लिए करें KNO₃ का छिड़काव
रोग और कीट प्रबंधन के लिए जनवरी में रूटीन कीटनाशक न छिड़कें. कीट दिखने पर 0.5 से 1 फीसदी नीम ऑयल का छिड़काव सुबह या शाम करें. फफूंदी या अन्य रोग होने पर मैन्कोजेब या कार्बेंडाजिम का उपयोग करें.
Mango Farmers: महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में आम की आवक शुरू हो गई है. लेकिन उत्तर भारत में आम के बाग में अभी मंजर (बौर) भी नहीं आए हैं. अगर आपके पास आम के बाग हैं और बंपर उत्पादन चाहते हैं, तो आपके लिए जनवरी का महीना बहुत ही महत्वपूर्ण है. अगर आप अभी बाग की सही तरह से देखरेख करते हैं, तो अच्छी पैदावार होगी और आम के स्वाद में भी निखार आएगा. इसलिए नीचे बताए गए टिप्स को किसान जरूर अपनाएं.
दरअसल, इस समय पेड़ तय करता है कि वह फूल और फल देगा या केवल नई पत्तियां उगाएगा. इसलिए अगर किसान गलत खाद या अनावश्यक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो पेड़ पर सिर्फ हरी पत्तियां ही आएंगी, फूल नहीं खिलेंगे. इससे उपज कम होगी और आम की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा. इसलिए समय पर सही देखभाल बहुत जरूरी है.
छोटे या पहले से बौर वाले पेड़ों पर यह स्प्रे न करें
जनवरी में आम के पेड़ों की सिंचाई सही तरीके से करना बहुत जरूरी है. इस समय पेड़ को ज्यादा पानी न दें, क्योंकि इससे फूलों की जगह सिर्फ नई पत्तियां बढ़ती हैं. जड़ों की मिट्टी हल्की नम रहनी चाहिए, गीली नहीं. फूल निकलने और बौर बनने के बाद ही पानी धीरे-धीरे बढ़ाएं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कदम फल की अच्छी पैदावार के लिए बेहद अहम है. अच्छे फूल (बौर) आने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃) का 1 फीसदी घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) केवल परिपक्व और स्वस्थ पेड़ों पर स्प्रे करें. एक बार का स्प्रे पर्याप्त है और हर साल जरूरी नहीं. कमजोर, छोटे या पहले से बौर वाले पेड़ों पर यह स्प्रे न करें.
नाइट्रोजन युक्त खाद का करें इस्तेमाल
जनवरी में आम के पेड़ों के लिए नाइट्रोजन युक्त खाद जैसे यूरिया या DAP न दें, क्योंकि इससे पत्तियां बढ़ती हैं, लेकिन फूल नहीं आते. इस समय पेड़ के नीचे हल्की जैविक खाद, जैसे सड़ी हुई गोबर या वर्मीकम्पोस्ट सीमित मात्रा में डालें. जिंक (Zn) की कमी होने पर नई पत्तियां छोटी, पतली और हल्की पीली या धूसर हरी होती हैं और बौर कम या कमजोर बनता है. बोरॉन (B) की कमी में बौर आता है लेकिन झड़ जाता है, फल गिरते हैं, आकार टेढ़ा-मेढ़ा होता है और फलों के अंदर काला या स्पंजी हिस्सा बनता है.
जनवरी में रूटीन कीटनाशक न छिड़कें
रोग और कीट प्रबंधन के लिए जनवरी में रूटीन कीटनाशक न छिड़कें. कीट दिखने पर 0.5 से 1 फीसदी नीम ऑयल का छिड़काव सुबह या शाम करें. फफूंदी या अन्य रोग होने पर मैन्कोजेब या कार्बेंडाजिम का उपयोग करें. फूल आने से पहले तेज कीटनाशक जैसे इमिडाक्लोप्रिड न दें. पेड़ के चारों ओर सूखी पत्तियां, खरपतवार और झाड़ियां हटाएं, हल्की गुड़ाई करें, लेकिन तने के पास गहरी खुदाई न करें. इससे जड़ों को हवा मिलती है और पेड़ स्वस्थ रहता है.