सख्त होगा नकली खाद, दवा का कानून, क्या मिल पाएगा किसानों को सुकून?

नकली उर्वरक एवं कीटनाशक दवाओं के प्रसार की लगातार गंभीर हो रही स्थिति को देखते हुए ही सरकार ने इस काले कारोबार के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है. केंद्र सरकार ने इस बाबत नया कीटनाशक प्रबंधन कानून बनाने की तैयारी कर ली है. इसके तहत कृषि मंत्रालय ने कानून का मसौदा बना लिया है.

निर्मल यादव
नोएडा | Updated On: 18 Jan, 2026 | 06:34 PM
देश की लगातार बढ रही खाद्यान्न जरूरतों को देखते हुए सरकार का पूरा जोर कृषि उपज को बढ़ाने पर है. इसके मद्देनजर किसानों पर भी उपज में इजाफा करने का है. कृषि उपज को बढ़ाने की सरकार एवं किसानों की मजबूरी के कारण ही पूरे देश में नकली खाद और कीटनाशक दवाओं का जाल तेजी से पूरे देश में अपने पैर पसार रहा है. नकली दवा कंपनियों की गिरफ्त में आकर न केवल किसान अपनी फसल को बर्बाद कर कर रहे हैं, बल्कि इन दवाओं के दुष्प्रभाव से खेत की मिट्टी भी जहरीली हो रही है.
नकली उर्वरक एवं कीटनाशक दवाओं के प्रसार की लगातार गंभीर हो रही स्थिति को देखते हुए ही सरकार ने इस काले कारोबार के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है.
केंद्र सरकार ने इस बाबत नया कीटनाशक प्रबंधन कानून बनाने की तैयारी कर ली है. इसके तहत कृषि मंत्रालय ने कानून का मसौदा बना लिया है. मंत्रालय की ओर बनाए गए  कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 को जनता के सुझावों के लिए सार्वजनिक कर दिया गया है. इससे जुडे सभी पक्षकार प्रस्तावित कानून के मसौदे पर आगामी 4 फरवरी तक अपने सुझाव दे सकेंगे.

नकली दवा के खिलाफ सख्त सजा के नियम और प्रोटोकॉल

प्रस्तावित कानून के मसौदे में जिन प्रावधानों को शामिल किया गया है, उनमें नकली दवाओं का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त सजा के नियमों के अलावा कीटनाशक दवाओं के निर्माण संबंधी प्रोटोकॉल को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है. जिससे इस कानून के लागू होने के बाद देश भर में किसानों को उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करके बनाई गई दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके.

हानिकारक रसायनों से खेती और किसानों को बचाने में मदद मिलेगी

सरकार का दावा है कि नया कानून लागू होने के बाद नकली दवाओं में इस्तेमाल हो रहे हानिकारक रसायनों के संपर्क में खेती की जमीन और किसानों को आने से रोका जा सकेगा. इसका सीधा असर नकली दवाओं के प्रयोग से कृषि उपज की मात्रा पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर भी होगा. जानकारों की राय में प्रस्तावित कानून को प्रभावी बनाने में सबसे अहम भूमिका वे प्रावधान निभाएंगे, जिनके तहत कानून को लागू करने वाले प्रवर्तन अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है. स्पष्ट है कि अगर किसी इलाके में नकली कीटनाशक दवाओं की बिक्री की पुष्टि होती है तो इसके लिए उन अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी, जिनकी जिम्मेदारी इसे रोकने की थी. प्रस्तावित कानून को प्रभावी बनाने वाले सजा से जुडे प्रावधान हैं.

10 से 40 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रस्तावित कानून के मसौदे में प्रावधान किया गया है कि नकली कीटनाशक दवाओं को बनाने, कारोबार करने, आयात या निर्यात करने और बेचने पर 3 साल तक की सजा मिलेगी. इसमें 10 से 40 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है. इस तरह के अपराध का पुराना रिकॉर्ड पाए जाने पर सजा के साथ जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है. नकली कीटनाशक के इस्तेमाल करने से या इनका कारोबार करने से किसी की मौत हो जाने या गंभीर चोट लगने पर 10 से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या 5 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान प्रस्तावित मसौदा कानून में किया गया है.
इसके अलावा कीटनाशक अगर सुरक्षा मानकों की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं या इनके निर्माण का लाइसेंस एवं प्रमाणपत्र लेने संबंधी नियमों का पालन नहीं करने के दोषी पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा. प्रस्तावित कानून के मुताबिक जुर्माने की राशि को घटाने या बढ़ाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा. इसके तहत कीटनाशक दवाओं का परीक्षण करने वाली प्रयोगशालाओं को भी मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति का गठन

कीटनाशक दवाओं के निर्माण से लेकर वितरण और प्रयोग करने तक की प्रक्रिया को भी प्रस्तावित कानून के मसौदे में शामिल किया गया है. इसके लिए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति का गठन करने की बात कही गई है. प्रस्तावित बोर्ड एवं समिति कीटनाशकों के जरिए मिट्टी से लेकर मनुष्यों तक फैल रही विषाक्तता को भी
रोकने का काम करेगी. इसमें लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से लेकर लेबलिंग करने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं.
जानकारों का मानना है कि इससे किसानों, उपभोक्ताओं एवं पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित होगी. विधेयक में कीटनाशक दवा निर्माताओं , वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है. साथ ही कीटनाशकों को बाजार में बिक्री हेतु उतारने से पहले उसका पंजीकरण कराने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. कुल मिलाकर प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले कीटनाशक ही बाजार में बेचे जा सकेंगे.
ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि सरकार प्रस्तावित कानून काे कितने प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है. स्पष्ट है कि कानून का प्रभाव, इसे प्रभावी ढंग से लागू करने पर ही निर्भर करेगा. भारत में भ्रष्टाचार की लगातार गहरी हो रही जड़ों के मद्देनजर ही इस कानून का भविष्य भी सवालों के घेरे में है.

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Published: 18 Jan, 2026 | 06:27 PM

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