Farmers Loan Maharashtra: महाराष्ट्र के किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा बीते दो सप्ताह से गरमाया हुआ था, जिसने आज एक बड़ा मोड़ ले लिया है. दरअसल, विपक्ष के विधायक रोहित पवार किसानों की कर्जमाफी में सरकारी शर्तों के खिलाफ अनशन पर बैठे थे, उनके साथ राज्यभर में किसानों के बीच आक्रोश पनप रहा था और बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही थी. इससे पहले ही राज्य सरकार ने एनसीपी एसपी के विधायक रोहित पवार की मांगों मान लिया है, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है.
किसानों की कर्जमाफी की शर्तें हटाने पर अड़े थे रोहित पवार
महाराष्ट्र सरकार ने दो सप्ताह पहले किसानों का कर्जमाफ करने का ऐलान किया था. लेकिन, कर्जमाफी के दायरे में आने वाले किसानों के लिए शर्तें आदि को लेकर नाराजगी बढ़ रही थी. किसानों के प्रदर्शन और पैदल मार्च के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने पंढूरपुर में अनशन शुरू कर दिया था. रोहित पवार मांग कर रहे थे कि किसानों पर कर्जमाफी के लिए लगाई गई सभी शर्तें हटाई जाएं और पूर्ण कर्जमाफी की जाए.
अनशन के बड़ा आंदोलन बनने से पहले सरकार ने मानी बात
सोलापुर जिले के पंढरपुर में किसानों के लिए संपूर्ण ऋण माफी की मांग को लेकर जारी शरद पवार के प्रपौत्र और विधायक रोहित पवार के अनशन का कई किसान संगठनों ने भी समर्थन किया. सरकार को यह आशंका थी कि किसान संगठन राज्य में बडे स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं. ऐसे में सरकार की ओर से मांगों को पूरा किए जाने की भरोसा दिलाया जा रहा था. लेकिन वह नहीं मान रहे थे.

विधायक रोहित पवार के अनशन को कई किसान संगठनों का समर्थन मिला.
मंत्री गिरीश महाजन के साथ होगी बैठक
सोमवार को सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया कि मंत्री गिरीश महाजन की ओर से चर्चा के लिए बैठक में बुलाकर उनकी समस्या का हल किया जाएगा. इसके बाद आज सोमवार को रोहित पवार ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है. रोहित पवार ने मीडिया से कहा कि सरकार से बैठक में किसानों की समस्या पर बात की जाएगी और कठिन शर्तों को हटाकर पूर्ण कर्जमाफी कराई जाएगी.
सरकार की 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी पर छिड़ा था विवाद
महाराष्ट्र सरकार कैबिनेट ने 2 जून को 36,585 करोड़ रुपये की ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना’ को मंजूरी दी थी, जिससे लगभग 55.72 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इस योजना के तहत 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए फसल ऋण को पात्र माना जाएगा. जिन किसानों पर 30 सितंबर 2025 तक बकाया फसल कर्ज होगा, उन्हें अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी मिल सकती है. वहीं, जो किसान समय पर अपने कर्ज का भुगतान करते रहे हैं, उन्हें सरकार की तरफ से अधिकतम 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा. वहीं, जिन किसानों का कर्ज 2 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें पहले 2 लाख रुपये से ऊपर की राशि खुद चुकानी होगी. इसके बाद शेष 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा. इन शर्तों को लेकर ही किसान नाराज थे और विवाद छिड़ गया था.