महाराष्ट्र ने महिला किसानों के लिए कानून को मंजूरी दी, जानें फायदों से लेकर आवेदन तक की पूरी जानकारी

Women’s Reservation Bill: महाराष्ट्र सरकार ने महिला किसानों को सशक्त बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. नए कानून के तहत खेती करने वाली पात्र महिलाओं को, भले ही जमीन उनके नाम न हो, किसान का दर्जा और प्रमाणपत्र मिलेगा. इससे वे ऋण, बीमा, सब्सिडी और कई सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगी.

नोएडा | Published: 3 Jul, 2026 | 03:46 PM

Women’s Reservation Bill: महाराष्ट्र विधानसभा ने महिला किसानों को पहचान और अधिकार देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. महिला किसानों को सीधे तौर पर कानूनी पहचान और दर्जा देने वाला पहला ऐतिहासिक कानून महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक (Maharashtra Women Farmers Empowerment Bill) है. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने इसे सदन में पेश किया. सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण भारत में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करेगा और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा.

खेती करने वाली महिलाओं को मिलेगी नई पहचान

नए कानून के तहत अब किसी महिला को किसान माने जाने के लिए उसके नाम पर जमीन होना जरूरी नहीं होगा. अगर कोई महिला खेती  या उससे जुड़े कार्यों में सक्रिय रूप से काम कर रही है, तो उसे आधिकारिक तौर पर महिला किसान का दर्जा मिलेगा. सरकार का मानना है कि अब तक लाखों महिलाएं खेती में काम कर रही थीं, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल पाती थी. इस कानून से उन्हें पहली बार औपचारिक पहचान मिलेगी और वे सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ सकेंगी.

खेती से जुड़े सभी क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

यह विधेयक सिर्फ फसल उत्पादन  तक सीमित नहीं है. इसमें मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री और लघु वनोपज संग्रह जैसे कामों में लगी महिलाओं को भी शामिल किया गया है. पात्र महिलाओं को एक विशेष प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिससे वे बैंक लोन, फसल बीमा, कृषि सब्सिडी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकेंगी. इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि महिलाओं के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो और उन्हें समान अवसर मिले.

ग्राम पंचायत स्तर पर आसान आवेदन प्रक्रिया

महिला किसान प्रमाणपत्र  पाने के लिए महिलाएं अपने ग्राम पंचायत में आवेदन कर सकेंगी. आवेदन की जांच ग्राम सभा करेगी और सभी योग्य मामलों में मंजूरी दी जाएगी. अगर किसी आवेदन को खारिज किया जाता है, तो उसका कारण लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा. शहरी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया नगर पंचायत की सामान्य सभा के माध्यम से पूरी की जाएगी. मंजूरी के 15 दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी करना जरूरी होगा, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी रहे.

स्वतः पहचान और शिकायत निवारण व्यवस्था

सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि अगर कोई पात्र महिला आवेदन नहीं कर पाती है, तो स्थानीय निकाय खुद उसकी पहचान कर उसे प्रमाणपत्र जारी करेंगे. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य महिला योजना से वंचित न रह जाए. इसके अलावा, सरकार विशेष सहायता केंद्र और शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाएगी. इससे महिलाओं की समस्याओं का समय पर समाधान होगा और योजना का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा. यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण  दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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