मक्का बना इथेनॉल का सबसे बड़ा फीडस्टॉक, पहली छमाही में रिकॉर्ड 515 करोड़ लीटर के पार पहुंची सप्लाई

Maize Emerges India Leading Ethanol Feedstock: उद्योग एक्सपर्ट का कहना है कि मक्का भारत का सबसे बड़ा इथेनॉल फीडस्टॉक बना है. विशेषज्ञों ने कहा कि मक्के के इस्तेमाल में तेजी से हो रही बढ़ोतरी से कई राज्यों में अनाज स्टोरेज, ग्रामीण सप्लाई चेन, इथेनॉल उत्पादन क्षमता और कृषि प्रॉसेसिंग यूनिट के बुनियादी ढांचे में नए निवेश की संभावना बढ़ाई है. 

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 11 May, 2026 | 03:59 PM

इथेनॉल उत्पादन में मक्का सबसे बड़ी फीडस्टॉक बनकर उभरा है. अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी से भारत के बायोफ्यूल विस्तार को गति मिली है. हालांकि, इंडस्ट्री ने इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ोत्तरी के अगले चरण के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन मांगा है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के अनुसार भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लगातार मजबूत गति दिखा रहा है. इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के पहले छह महीनों के दौरान कुल इथेनॉल आपूर्ति लगभग 515 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है.

मक्का समेत अनाज के फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल होने से 1,059 करोड़ लीटर की कुल अनुबंधित मात्रा के मुकाबले इंडस्ट्री ने आपूर्ति वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में ही लगभग 49 फीसदी आपूर्ति कर दी है. यह इस क्षेत्र की बढ़ती उत्पादन क्षमता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में इसकी रणनीतिक भूमिका की पुष्टि करता है. नवीनतम आपूर्ति डेटा से से पता चलता है कि मक्का का भारत के सबसे बड़े एकल इथेनॉल फीडस्टॉक के रूप में उभरा है.

मक्का भारत का सबसे बड़ा इथेनॉल फीडस्टॉक बना

अनाज आधारित डिस्टिलरी ने लगभग 333 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन का योगदान दिया है और सभी फीडस्टॉक में मक्का का सबसे अधिक इस्तेमाल हुआ है. आंकड़ों के अनुसार मक्का आधारित इथेनॉल लगभग 182 करोड़ लीटर की आपूर्ति के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना है. सरप्लस चावल या खाद्यान्न (SFG) ने लगभग 125 करोड़ लीटर का योगदान दिया है. इसी तरह क्षतिग्रस्त खाद्यान्न (DFG) का उपयोग करने वाली डिस्टिलरी ने लगभग 26 करोड़ लीटर की आपूर्ति की है.

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मक्के के इस्तेमाल में तेजी से हो रही बढ़ोतरी

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मक्का में लंबे समय तक उत्पादन बढ़ाने की क्षमता साल भर उपलब्धता और मजबूत सप्लाई चेन की सुविधा है. इसमें दूसरे कच्चे माल के मुकाबले काफी कम पानी की जरूरत होती है और यह भारत के E20 से आगे ज्यादा इथेनॉल मिलाने के भविष्य के लक्ष्यों के साथ बेहतर तालमेल बिठाता है. विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मक्के के इस्तेमाल में तेजी से हो रही बढ़ोतरी से कई राज्यों में अनाज स्टोरेज, ग्रामीण सप्लाई चेन, इथेनॉल उत्पादन क्षमता और कृषि प्रॉसेसिंग यूनिट के बुनियादी ढांचे में नए निवेश की संभावना बढ़ाई है.

गन्ने से बनने वाले इथेनॉल आंकड़े भी जबरदस्त

गन्ने पर आधारित डिस्टिलरियों ने इसी दौरान लगभग 182 करोड़ लीटर इथेनॉल की सप्लाई की है जो उनके तय किए गए कुल सप्लाई लक्ष्य का लगभग 62 फीसदी था. गन्ने के रस (SCJ) का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जो लगभग 130 करोड़ लीटर था. यह तय की गई कुल सप्लाई का लगभग 79 फीसदी था. वहीं, B-हैवी शीरे (BHM) से लगभग 45 करोड़ लीटर इथेनॉल की सप्लाई हुई. इसके अलावा C-हैवी शीरे (CHM) का योगदान लगभग 7 करोड़ लीटर रहा है.

इथेनॉल की सप्लाई में लगातार तेजी

इथेनॉल की मासिक सप्लाई के आंकड़ों से भी पता चलता है कि इसमें लगातार तेजी बनी हुई है. दिसंबर 2025 में लगभग 102 करोड़ लीटर सप्लाई दर्ज की गई. जबकि, मार्च 2026 में लगभग 95 करोड़ लीटर और अप्रैल 2026 में लगभग 92 करोड़ लीटर सप्लाई दर्ज की गई. सप्लाई में बनी रहने वाली यह तेजी, काम करने के तरीकों में आ रही कुशलता, उत्पादन क्षमता में तेजी से हो रहे विस्तार और किसानों, डिस्टिलरियों के साथ ही तेल कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाती है.

एक्सपर्ट का नीतिगत स्थिरता की जरूरत पर जोर

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के प्रेसिडेंट विजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का इथेनॉल प्रोग्राम अब विकास के निर्णायक दौर में पहुंच गया है और अपनी पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए इसे लंबी अवधि की नीतिगत स्थिरता की जरूरत है. भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम आज दुनिया भर में सबसे तेजी से बढ़ती बायोफ्यूल की सफल कहानियों में से एक है. मक्के का मुख्य फीडस्टॉक के रूप में उभरना इस क्षेत्र की बढ़ती परिपक्वता, विविधीकरण और लंबी अवधि की स्थिरता को दर्शाता है.

AIDA की डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी ने इस बात पर जोर दिया कि “ESY 2025-26 के सिर्फ पहले छमाही में ही 515 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल की सप्लाई करना, इस उद्योग की मजबूत उत्पादन क्षमताओं को दर्शाता है. यह क्षेत्र अब ऊंचे ब्लेंडिंग लक्ष्यों, फ्लेक्स फ्यूल मोबिलिटी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अगली पीढ़ी के बायोफ्यूल को समर्थन देने के लिए तैयार है.

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Published: 11 May, 2026 | 03:59 PM
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