मंडियों में MSP से कम मक्का का रेट, किसानों को नुकसान.. सरकारी खरीद शुरू करने की उठी मांग

करनाल की मंडियों में गर्मी मक्का की आवक दोगुनी होकर 3.58 लाख क्विंटल पहुंची, लेकिन MSP पर सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई. किसानों को निजी व्यापारियों को 1100-2000 रुपये में फसल बेचनी पड़ रही है, जबकि MSP 2410 रुपये है. किसानों और विशेषज्ञों ने सरकार से समर मक्का की MSP खरीद शुरू करने की मांग की है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 26 Jun, 2026 | 12:04 PM

Maize Purchase: हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में गर्मी की मक्का की आवक तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में किसानों ने राज्य सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद नहीं होने के कारण उन्हें अपनी फसल निजी व्यापारियों को MSP से काफी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है. गर्मी की मक्का रबी और खरीफ सीजन के बीच उगाई जाने वाली फसल है. इसकी बुवाई फरवरी- मार्च में आलू, सरसों और मटर की फसल कटने के बाद की जाती है, जबकि कटाई जून में शुरू होती है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 23 जून तक करनाल जिले की मंडियों में 3.58 लाख क्विंटल से अधिक मक्का पहुंच चुकी है. यह पिछले साल की इसी अवधि के 1.89 लाख क्विंटल के मुकाबले लगभग दोगुनी है. सबसे ज्यादा 1.63 लाख क्विंटल मक्का करनाल मंडी में पहुंची है. इसके बाद इंद्री में 97,500 क्विंटल, घरौंडा में 67,116 क्विंटल, निसिंग में 26,935 क्विंटल और कुंजपुरा में 3,335 क्विंटल मक्का की आवक दर्ज की गई है.

MSP से कम रेट पर मक्का की बिक्री

मक्का की आवक बढ़ने के बावजूद किसानों का आरोप है कि सरकार गर्मी की मक्का की खरीद  नहीं कर रही है. इसके चलते उन्हें अपनी उपज निजी व्यापारियों को 1,100 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है, जबकि सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता बहादुर सिंह मेहला ने द ट्रिब्यून से कहा कि सरकार किसानों को धान की जगह मक्का और दूसरी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करती है, लेकिन जब फसल बेचने का समय आता है तो खरीद की उचित व्यवस्था नहीं होती. उन्होंने कहा कि हर साल मक्का का MSP घोषित किया जाता है, लेकिन मंडियों में किसानों की फसल खरीदने के लिए प्रभावी सरकारी व्यवस्था नहीं होने से उन्हें कम दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि गर्मी की मक्का की खरीद MSP पर जल्द शुरू की जाए.

मंडियों में मक्का की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित हो

किसान सुखजिंदर सिंह का कहना है कि सरकार की खरीद नीति में खरीफ और रबी के साथ-साथ गर्मी की मक्का को भी शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सिर्फ MSP घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को इसकी कानूनी गारंटी  देनी चाहिए और सभी मंडियों में मक्का की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि खरीफ और रबी सीजन की मक्का की खरीद MSP पर की जाती है, लेकिन गर्मी की मक्का को इससे बाहर रखा गया है. उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों के पास अपनी उपज निजी व्यापारियों को समर्थन मूल्य से काफी कम दाम पर बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.

निजी व्यापारियों को उपज बेचने को मजबूर मक्का किसान

उन्होंने कहा कि सरकार की खरीद व्यवस्था न होने के कारण किसानों को अपनी फसल निजी व्यापारियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इसलिए उन्होंने मांग की कि गर्मी (समर) मक्का की भी MSP पर सरकारी खरीद की जाए. डॉ. लाठर ने किसानों को यह भी सलाह दी कि वे गर्मी में मूंग की खेती पर विचार करें, क्योंकि इसमें मक्का की तुलना में बहुत कम पानी लगता है. लगभग 3 से 4 बार सिंचाई ही पर्याप्त होती है, जबकि गर्मी मक्का को 15 से ज्यादा बार पानी देना पड़ता है. साथ ही मूंग की खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के एक अधिकारी ने कहा कि गर्मी मक्का की MSP पर खरीद का फैसला बाजार समितियां नहीं, बल्कि सरकार के स्तर पर लिया जाता है.

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Published: 26 Jun, 2026 | 12:02 PM

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