Mauni Amavasya 2026: एक दिन, अनगिनत पुण्य! मौनी अमावस्या पर जरूर करें ये काम, जानें स्नान-दान के नियम

Mauni Amavasya 2026 Date: मौनी अमावस्या सनातन परंपरा का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसमें स्नान, दान और मौन व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, जरूरतमंदों को दान और पितरों का तर्पण करने से आत्मशुद्धि होती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि व आध्यात्मिक शांति का संचार होता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Jan, 2026 | 01:21 PM

Mauni Amavasya Significance: सनातन धर्म में माघ माह की अमावस्या को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है. इसी अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, जो आत्मशुद्धि, पाप मोचन और पुण्य संचय का बड़ा पर्व माना जाता है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस बार यह तिथि और भी खास है, क्योंकि मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे हर कार्य में सफलता देने वाला माना जाता है.

मौनी अमावस्या 2026 का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण अमावस्या तिथि 18 जनवरी को रात 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी को 1:21 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार 18 जनवरी को ही स्नान-दान का पुण्यकाल माना जाएगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक सबसे उत्तम रहेगा. वहीं स्नान-दान के लिए सुबह 5:27 से दोपहर 12:32 बजे तक का समय श्रेष्ठ माना गया है. सर्वार्थ सिद्धि योग 18 जनवरी सुबह 10:14 बजे से 19 जनवरी सुबह 7:14 बजे तक रहेगा.

रवि मौनी अमावस्या का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष मौनी अमावस्या रविवार को पड़ रही है, इसलिए इसे रवि मौनी अमावस्या कहा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव के प्रभाव से यह संयोग अत्यंत फलदायी होता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और तेज की वृद्धि भी होती है.

मौनी अमावस्या पर स्नान-दान की विधि

मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाना चाहिए. इसके बाद स्नान की तैयारी करें. यदि संभव हो तो गंगा स्नान करना सर्वोत्तम माना जाता है. जो लोग गंगा तट तक नहीं जा सकते, वे स्नान के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

मौन व्रत का महत्व

मौनी अमावस्या की सबसे बड़ी परंपरा मौन व्रत है. मान्यता है कि इस दिन स्नान से पहले मौन रहना चाहिए और स्नान के बाद भी अनावश्यक बातचीत से बचना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति पूरे दिन मौन व्रत रखना चाहता है, तो उसे विधिवत संकल्प लेना चाहिए. बिना संकल्प के किया गया व्रत पूर्ण फल नहीं देता. मौन रहने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं.

पूजा, दान और पितृ तर्पण

स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें. इसके पश्चात अपनी सामर्थ्य के अनुसार काला तिल, अन्न, कंबल, गर्म वस्त्र या धन का दान करें. साथ ही कुश की पवित्री से पितरों को जल अर्पित कर तर्पण करें. पितरों के नाम से किया गया दान उन्हें संतुष्टि देता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में उन्नति होती है.

पुराणों में मौनी अमावस्या का महत्व

पुराणों में बताया गया है कि माघ माह में स्नान और दान करने से भगवान विष्णु विशेष कृपा करते हैं. मौनी अमावस्या पर श्रद्धा से किया गया गंगा स्नान मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है.

(Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और लोक विश्वासों पर आधारित है. यहां दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. किसी भी प्रकार के व्रत, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले योग्य विद्वान या पंडित से परामर्श अवश्य लें.)

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