हरियाणा में दूध उत्पादन के मुकाबले सप्लाई ज्यादा होने पर मिलावटी दूध की सप्लाई किए जाने का आरोप लगाया है. किसान संगठन भारतीय किसान एकता ने बताया है कि सिरसा जिले में किसानों के जरिए रोजाना कुल दूध का उत्पादन 45 हजार लीटर किया जा रहा है. जबकि, हर दिन करीब 80 हजार लीटर दूध ग्राहकों को सप्लाई किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठा है कि 35 हजार लीटर दूध कहां से पूरा किया जा रहा है. संगठन का आरोप है कि हरियाणा दूध डेयरी संघ की संस्था वीटा के जरिए 35 हजार लीटर नकली और मिलावटी दूध ग्राहकों में खपाया जा रहा है. इसके अलावा दूध भुगतान, कम मूल्य के साथ ही वीटा मिल्क प्लांट में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं. मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चिट्ठी भेजी गई है.
दूध मूल्य कम और भुगतान नहीं होने पर भड़के किसान
हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन की ओर से संचालित प्रमुख डेयरी ब्रांड वीटा मिल्क पर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. भारतीय किसान एकता बीकेई अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि दूध संघ सिरसा पशुपालक डेयरी किसानों के साथ लंबे समय से मनमानी कर रहा है. अब तक किसानों को दूध भुगतान नहीं किया गया है. बाजार में दूसरी कंपनियों के दूध के मूल्य वीटा से काफी अधिक हैं, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद भी दूध मूल्य नहीं बढ़ाया जा रहा है.
35 हजार लीटर घटिया दूध सप्लाई का आरोप
लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि दूध की आवक 75 से 80 हजार लीटर प्रति दिन है, जबकि किसानों का कहना है कि गर्मी की वजह से 45 हजार लीटर से ऊपर दूध की पैदावार नहीं हो रही है. इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 30-35 हजार लीटर नकली तैयार किया गया दूध वीटा मिल्क प्लांट सिरसा के अधिकारियों की मिलीभगत से लिया जा रहा है, जिसे ग्राहकों में खपाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि दुग्ध संघ सिरसा में बीएमसी से मिल्क प्लांट तक दूध खरीद प्रक्रिया में कथित मिलीभगत से मिलावटी एवं घटिया क्वालिटी का दूध खरीदा जा रहा है. आरोप है कि रिकॉर्ड में दूध की क्वालिटी को बेहतर दर्शाकर उसे अन्य दूध में मिलाया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
दूध खरीद रिकॉर्ड और मिल्क ट्रैक शीट में गड़बड़ियां
किसान नेता ने आरोप लगाया कि रेगुलर और अनुभवी कर्मचारियों को उनके कार्य से हटाकर अन्य स्थानों पर बैठाया गया है तथा उनकी जगह अस्थायी कर्मचारियों से महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा रहे हैं. इससे कार्यप्रणाली की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. उन्होंने बताया कि राजस्थान की दुग्ध समितियों से संबंधित दूध खरीद रिकॉर्ड एवं मिल्क ट्रैक शीट में कथित रूप से हेरफेर कर दुग्ध संघ को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है. उत्पादन विभाग में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं की ओर वरिष्ठ ऑडिटर द्वारा भी संकेत किया जा चुका है, लेकिन आज तक संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.
मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर पहले भी भ्रष्टाचार में नाम आ चुका
सीएम को भेजी चिट्ठी में किसान नेता ने कहा कि वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश मेहता का नाम पूर्व में भी कथित भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में सामने आ चुका है. यदि इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं. इन अनियमितताओं के कारण दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को समय पर दूध का भुगतान नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें मजबूर होकर अपना दूध निजी व्यापारियों को कम मूल्य पर बेचना पड़ता है. इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है.