केंद्र का बड़ा फैसला, अब नॉमिनी भी बेच सकेंगे मूंग-उड़द, बायोमेट्रिक फेल होने पर मिलेगी राहत

Mung MSP Procurement MP: मध्य प्रदेश के मूंग और उड़द किसानों को बड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि अगर MSP खरीद के दौरान किसान का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन फेल हो जाता है, तो वह नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) के जरिए अपनी फसल बेच सकेगा.

नोएडा | Updated On: 5 Aug, 2026 | 06:44 PM

Moong MSP Procurement: मध्य प्रदेश के मूंग और उड़द उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत फसल खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अहम फैसला लिया है. अब अगर किसी किसान का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन फेल हो जाता है, तो वह नॉमिनी के माध्यम से अपनी उपज MSP पर बेच सकेगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि, तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र किसान अपनी फसल बेचने से वंचित न रहे.

हालांकि, नॉमिनी के लिए E-KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा, जबकि फसल का पूरा भुगतान सीधे किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही भेजा जाएगा. इसके अलावा, एक व्यक्ति केवल एक ही किसान का नॉमिनी बन सकेगा.

क्या है सरकार का नया फैसला?

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीद के लिए नया नियम लागू किया है. इसके तहत अगर किसान का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन सफल नहीं होता है, तो वह अपनी ओर से एक नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) के माध्यम से फसल बेच सकेगा.

यह फैसला मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर ‘वन-टाइम एक्सेप्शन’ के तौर पर लिया गया है. इसका उद्देश्य उन किसानों को राहत देना है, जिन्हें फिंगरप्रिंट मैच न होने या अन्य तकनीकी कारणों से खरीदी केंद्रों पर परेशानी का सामना करना पड़ता था.

किन किसानों को मिलेगा इसका फायदा?

यह सुविधा खास तौर पर उन किसानों के लिए है जिनका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन बार-बार फेल हो जाता है. पहले ऐसे किसान अपनी उपज बेचने में मुश्किलों का सामना करते थे, लेकिन अब वे सरकार की तय प्रक्रिया के तहत नॉमिनी की मदद से MSP पर बिक्री कर सकेंगे.

ऐसे होगी पूरी प्रक्रिया

सरकार ने इस व्यवस्था के लिए कुछ जरूरी नियम भी तय किए हैं. सबसे पहले किसान को खरीदी केंद्र पर खुद उपस्थित होना होगा. वहां उसका आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. अगर कई प्रयासों के बाद भी सत्यापन सफल नहीं होता, तभी इस विशेष व्यवस्था का लाभ मिलेगा. इसके बाद किसान की सहमति से उसकी लाइव फोटो ली जाएगी. इस फोटो का मिलान आधार रिकॉर्ड से किया जाएगा. पहचान की पुष्टि होने के बाद किसान ऑनलाइन सिस्टम से जनरेट होने वाले नॉमिनी आवेदन फॉर्म के जरिए एक प्रतिनिधि को नामित कर सकेगा.

नॉमिनी के लिए भी होंगे सख्त नियम

सरकार ने नॉमिनी को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए हैं. नॉमिनी को खरीदी केंद्र पर OTP आधारित e-KYC करानी होगी. इसके बाद उसका आधार सत्यापन और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा. साथ ही उसकी रीयल-टाइम फोटो भी ली जाएगी, जिसका मिलान आधार रिकॉर्ड से किया जाएगा. सबसे अहम बात यह है कि एक व्यक्ति केवल एक ही किसान का नॉमिनी बन सकता है. वह एक साथ दो या उससे अधिक किसानों का प्रतिनिधि नहीं बन सकेगा.

भुगतान सीधे किसान के खाते में जाएगा

सरकार ने साफ कर दिया है कि, फसल की बिक्री के बाद मिलने वाली पूरी राशि केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही भेजी जाएगी. किसी भी स्थिति में भुगतान नॉमिनी के खाते में नहीं जाएगा. इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे.

बायोमेट्रिक फेल होने पर दूसरे विकल्प भी होंगे

अगर फिंगरप्रिंट से पहचान नहीं हो पाती है, तो राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां फेस ऑथेंटिकेशन या आइरिस ऑथेंटिकेशन जैसे दूसरे विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके लिए सभी रिकॉर्ड, ऑथेंटिकेशन लॉग, ऑनलाइन नॉमिनी फॉर्म और किसान व नॉमिनी की लाइव तस्वीरों को सुरक्षित रखा जाएगा.

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस नए फैसले से उन किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जो तकनीकी वजहों से अब तक अपनी फसल MSP पर बेचने में परेशानी झेल रहे थे. अब बायोमेट्रिक फेल होने पर भी उनकी उपज की सरकारी खरीद नहीं रुकेगी. इससे खरीद प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और किसान हितैषी बनेगी, साथ ही पात्र किसानों को समय पर MSP का लाभ मिल सकेगा.

Published: 5 Aug, 2026 | 05:32 PM

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