99 लाख के विवाद के बाद NHB के नियम बदले, अब इन लोगों को नहीं मिलेगी सब्सिडी
NHB की बागवानी और कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना के नियम अब सख्त हो गए हैं. सांसद, मंत्री, विधायक और कई सरकारी कर्मचारी पात्र नहीं होंगे. परिवार के सिर्फ एक सदस्य को लाभ मिलेगा. सामान्य राज्यों में सब्सिडी 50 से घटकर 35 प्रतिशत कर दी गई है.
Horticulture Subsidy: केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक बागवानी और कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी सब्सिडी योजना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियम 21 अगस्त से लागू हो गए हैं. अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से लेकर सांसद, मंत्री, विधायक और कई सरकारी कर्मचारी इस योजना के तहत सब्सिडी नहीं ले सकेंगे. इसके साथ ही एक परिवार में सिर्फ एक सदस्य को ही योजना का लाभ देने का प्रावधान किया गया है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए करीब 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला चर्चा में आया था. विवाद के बाद मंत्री ने यह राशि वापस कर दी थी.
नेताओं और कई सरकारी कर्मचारियों को योजना से बाहर किया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत वर्तमान में संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति, केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा सांसद, विधायक, नगर निगम के मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष अब योजना के पात्र नहीं होंगे. इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों में काम करने वाले कर्मचारी भी सब्सिडी का लाभ नहीं उठा सकेंगे. हालांकि, ग्रुप डी के कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है. वहीं, 10,000 रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी भी योजना के लिए अपात्र होंगे.
परिवार के एक सदस्य को ही मिलेगा सब्सिडी का लाभ
NHB ने योजना में ‘परिवार’ की परिभाषा भी बदल दी है. पहले पति, पत्नी और आश्रित नाबालिग बच्चों को परिवार माना जाता था. अब इसमें पति या पत्नी के साथ पिता, माता, बेटे और बेटियों को भी शामिल किया गया है. नए नियम के अनुसार परिवार के किसी एक सदस्य को मिली सब्सिडी पूरे परिवार को मिली सहायता मानी जाएगी. ऐसे में परिवार का दूसरा सदस्य दोबारा किसी NHB योजना के तहत वित्तीय सहायता नहीं ले सकेगा. यह नियम उस स्थिति में भी लागू होगा, जब पहले सदस्य ने निर्धारित अधिकतम सब्सिडी सीमा का पूरा इस्तेमाल नहीं किया हो.
सामान्य राज्यों में सब्सिडी 50 से घटकर 35 प्रतिशत
सरकार ने सब्सिडी की दरों में भी बदलाव किया है. सामान्य राज्यों में अब सब्सिडी का हिस्सा 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी 45 प्रतिशत रखी गई है. नए नियमों में लाभार्थियों को स्वैच्छिक रूप से योजना से बाहर निकलने का विकल्प भी दिया गया है. इसके तहत लाभार्थी पूरी सब्सिडी राशि ब्याज सहित वापस करके योजना छोड़ सकता है. गलत जानकारी देकर सब्सिडी लेने पर पूरी राशि ब्याज समेत वसूल की जाएगी.
99.60 लाख की सब्सिडी का विवाद बना बदलाव की वजह
नियमों में यह बदलाव उस विवाद के बाद आया है, जिसमें सरकारी पद पर बैठे लोगों के योजना का लाभ लेने पर सवाल उठे थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को योजना के तहत खीरे की खेती के लिए 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने की बात सामने आई थी. मामला सार्वजनिक होने के बाद उन्होंने सब्सिडी की राशि वापस कर दी. हालांकि, सरकार ने नियमों में बदलाव को व्यापक पात्रता और योजना की पारदर्शिता से जुड़ा कदम बताया है. नए प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी पदों पर बैठे लोगों की जगह वास्तविक पात्र लाभार्थियों को बागवानी और कोल्ड स्टोरेज योजनाओं का लाभ मिल सके.