महाराष्ट्र समेत देश के अन्य हिस्सों में किसानों की आत्महत्या के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. बीते सप्ताह ओडिशा में धान बिक्री नहीं होने पर किसानों ने आत्महत्या कर ली. महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों ने चौंका दिया है. महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में बताया है कि साल 2023 में 6,669 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की. वहीं, एनसीआरबी और राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2024, 2025 और 2026 में भी किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं.
महाराष्ट्र में 2023 में 6669 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने जान दी
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने गुरुवार को राज्य विधानसभा को बताया कि 2023 में महाराष्ट्र में 6,669 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की. NCP विधायक धर्मरावबाबा अत्राम के एक सवाल के लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि आत्महत्या के ये आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2023 के अनुमानों पर आधारित थे.
सरकार ने माना आत्महत्या करने वालों में महिला किसान भी
मंत्री ने कहा कि यह सच है कि आत्महत्या करने वालों में 4,150 किसान और 2,519 खेतिहर मजदूर थे. अपनी जान देने वाले खेतिहर मजदूरों में 77 महिलाएं थीं. वहीं, क्या उन 29 खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याओं को सूची से बाहर रखा गया था जिनके पास कोई कृषि भूमि नहीं थी, इस सवाल के जवाब में पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने बिना कोई स्पष्टीकरण या विवरण दिए संक्षेप में कहा कि यह आंशिक रूप से सच है.
विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जमकर आलोचना की
सरकार का यह जवाब खेती से जुड़ी आत्महत्या के मामलों के वर्गीकरण और इस बात को लेकर चिंता के बीच आया कि क्या आधिकारिक आंकड़ों में सभी पात्र खेतिहर मजदूरों को शामिल किया गया था. विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महाराष्ट्र में किसानों और खेतिहर मजदूरों की खराब होती आर्थिक स्थिति और कर्ज में डूबने से उबारने में सरकारी मदद नहीं मिलने से किसान अपनी उम्मीद खो रहे हैं और आत्मघाती कदम उठाने के मजबूर हुए.
2024 से 2026 तक किसानों की आत्महत्या के मामले भयावह
राज्य के राहत और पुनर्वास मंत्री द्वारा विधान परिषद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 2024 में किसानों की आत्महत्या के 2,635 मामले दर्ज किए गए. महाराष्ट्र में 2025 के शुरुआती नौ महीनों में 781 किसानों ने आत्महत्या की. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में जनवरी और मई 2026 के बीच अकेले यवतमाल जिले में 102 किसानों ने आत्महत्या की है. जबकि, पूरे राज्य का आंकड़ा अभी जारी होना बाकी है.
क्यों बढ़ रहीं किसानों की आत्महत्या की घटनाएं
महाराष्ट्र के किसान भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. वहीं, कर्ज लेकर खेती करने और फिर विपरीत मौसम से बर्बाद होने पर किसानों को सरकारी मदद समय पर नहीं मिल पाने से उनमें निराशा बढ़ती है. बीते सप्ताह कर्जमाफी को लेकर विपक्षी नेताओं ने विधासनभा परिसर में प्रदर्शन किया था और कहा था कि राज्य के किसान अभी भी कर्ज, घटती जमीन की जोत और जलवायु संबंधी झटकों के कारण गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं.
विपक्ष ने कहा कि यह दुखद कृषि संकट मुख्य रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में अधिक है, जो बढ़ते कर्ज और फसल खराब होने की वजह से और गहरा गया. सरकार के ढुलमुल रवैये और किसान विरोधी नीतियों के चलते अन्नदाता आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होते हैं.