क्या पशुओं के लिए भी खुलेगा दया मृत्यु का रास्ता? अवारा कुत्तों पर कोर्ट की टिप्पणी पर लोगों की राय भिन्न
देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने राज्यों को तुरंत ठोस कदम उठाने, हर जिले में ABC सेंटर बनाने और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. फैसले के बाद पशु अधिकार और मानव सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है.
Stray Dogs: देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों ने अब एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या इंसानों की सुरक्षा के लिए पशुओं के लिए भी दया मृत्यु यानी यूथेनेशिया का रास्ता खोला जाएगा? इसी मुद्दे पर सुप्रीम Court ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि आम लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों की समस्या पर तुरंत ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. वहीं पशु अधिकारों की पक्षधर और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी (Maneka Gandhi) ने कहा कि उनका मानना है कि आवारा कुत्तों के लिए एबीसी सेंटर बनाए जाएं, लेकिन वे बेहतर और व्यवस्थित हों, घटिया नहीं. इस बयान के बाद पशु सुरक्षा और लोगों की सुरक्षा को लेकर देशभर में नई बहस तेज हो गई है.
अदालत बोली-अब आंख नहीं फेर सकते
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि देशभर से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें आवारा कुत्तों ने बच्चों और बुजुर्गों पर हमला किया है. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और ये स्थिति अब गंभीर हो चुकी है. कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया गया. अदालत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय यात्री तक इन घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, इसलिए सरकारों को अब तेजी से काम करना होगा.
हर जिले में बनेगा ABC सेंटर
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बनाया जाए. इन सेंटरों में नसबंदी, इलाज और देखभाल की पूरी व्यवस्था होगी. अदालत ने कहा कि इन केंद्रों में सर्जिकल सुविधाएं, प्रशिक्षित कर्मचारी और जरूरी लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराए जाएं. कोर्ट ने ये भी साफ किया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बिना देरी किए इन निर्देशों को लागू करना होगा. इसके अलावा अदालत ने सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए भी विशेष इंतजाम करने को कहा गया है.
ABC सेंटर और शेल्टर की व्यवस्था पर जताई नाराजगी
दिल्ली में पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टॉप के आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने और शेल्टर बनाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन किसी भी जिले में सही तरीके से शेल्टर नहीं बनाए गए. मेनका गांधी ने मांग की कि बेहतर ABC (Animal Birth Control) सेंटर बनाए जाएं. उनका आरोप है कि मौजूदा सेंटरों में जानवरों की सही देखभाल नहीं होती और ऑपरेशन के बाद कुत्तों को एक इलाके से दूसरे इलाके में छोड़ दिया जाता है.
#WATCH दिल्ली: पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा, “उन्होंने कहा है कि अब हम नहीं सुनेंगे और अगर आपको हमारे फैसले से कोई ऐतराज है तो आप हाई कोर्ट जा सकते हैं। इन्होंने पिछले ऑर्डर में बहुत सख्ती से कहा था कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बस स्टॉप से आवारा… https://t.co/2LMxrNU7n1 pic.twitter.com/cw0b6eVt3F
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 19, 2026
खतरनाक और रेबीज पीड़ित कुत्तों पर सख्त फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई कुत्ता रेबीज से संक्रमित है, लाइलाज बीमारी से पीड़ित है या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक है, तो ऐसे मामलों में मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी. अदालत ने कहा कि ऐसे कुत्तों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत दया मृत्यु देने पर विचार किया जा सकता है. कोर्ट का मानना है कि आम लोगों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता. इस फैसले को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है. कई लोगों ने इसे आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि पशु अधिकार संगठनों ने इसे संवेदनशील मुद्दा करार दिया है.
अधिकारियों को सुरक्षा, हाई कोर्ट्स को निगरानी का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि आदेश लागू करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर या आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी, यदि उन्होंने सरकारी काम अच्छी नीयत से किया हो. अदालत ने सभी हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में स्वतः संज्ञान लें और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी आदेश जारी करें. इसके साथ ही जो अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे या जानबूझकर लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अब देश में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.