बंजर जमीन पर नहीं उग रही फसल, तो वहां इमली उगाइए… किसानों को होगी लाखों में कमाई

पिछले कुछ सालों में इमली की मांग तेजी से बढ़ी है. गर्मियों में इमली का शरबत और पाउडर खूब बिकता है, वहीं शादी-ब्याह और त्योहारों में इमली से बने उत्पादों की खपत बढ़ जाती है. आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों में भी इमली का इस्तेमाल बढ़ा है. यही कारण है कि किसान अगर सही समय पर और सही तरीके से अपनी पैदावार बाजार तक पहुंचाएं, तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं.

नई दिल्ली | Published: 2 Feb, 2026 | 02:18 PM

Tamarind farming: आज के समय में खेती करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है. मौसम का बदलता मिजाज, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. ऐसे हालात में किसान अब उन फसलों और पेड़ों की तलाश में हैं, जो कम खर्च में, कम देखभाल के साथ लंबे समय तक अच्छी आमदनी दे सकें. इमली का पेड़ इसी तलाश का एक मजबूत जवाब बनकर सामने आया है. खास बात यह है कि इमली की खेती सिर्फ उपजाऊ खेतों में ही नहीं, बल्कि बंजर और कम उपज देने वाली जमीन पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है.

क्यों खास है इमली का पेड़

इमली एक ऐसा पेड़ है, जो एक बार लग जाए तो सालों तक फल देता रहता है. इसे ज्यादा पानी, ज्यादा खाद या बहुत अधिक मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि इमली को “कम मेहनत, ज्यादा मुनाफे” वाला पेड़ कहा जाता है. इमली के फल का इस्तेमाल सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि जूस, चटनी, अचार, मसाले और आयुर्वेदिक दवाओं में भी बड़े पैमाने पर होता है. इस कारण बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है.

बढ़ती मांग ने बढ़ाई कमाई की संभावना

पिछले कुछ सालों में इमली की मांग तेजी से बढ़ी है. गर्मियों में इमली का शरबत और पाउडर खूब बिकता है, वहीं शादी-ब्याह और त्योहारों में इमली से बने उत्पादों की खपत बढ़ जाती है. आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों में भी इमली का इस्तेमाल बढ़ा है. यही कारण है कि किसान अगर सही समय पर और सही तरीके से अपनी पैदावार बाजार तक पहुंचाएं, तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं.

बंजर जमीन भी बनेगी कमाई का जरिया

इमली का पेड़ खास तौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास ऐसी जमीन है जहां पारंपरिक फसलें नहीं हो पातीं. यह पेड़ सूखा सहन कर सकता है और कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ता है. हल्की, पथरीली या कम उपज वाली मिट्टी में भी इमली का पेड़ जड़ पकड़ लेता है. बस ध्यान यह रखना होता है कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि ज्यादा नमी इमली के लिए नुकसानदायक हो सकती है.

खेती शुरू करने से पहले क्या करें तैयारी

इमली की खेती शुरू करने से पहले जमीन को एक-दो बार अच्छी तरह जोत लेना चाहिए, ताकि मिट्टी नरम हो जाए. इसके बाद गड्ढे तैयार करके उनमें गोबर की सड़ी खाद या जैविक खाद मिलाना फायदेमंद रहता है. इससे पौधे को शुरुआती पोषण मिलता है और उसकी बढ़वार अच्छी होती है. नर्सरी से स्वस्थ और अच्छे किस्म के पौधे चुनना बहुत जरूरी है, क्योंकि वही आगे चलकर अच्छी पैदावार की नींव रखते हैं.

रोपण का सही समय और तरीका

इमली के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मानसून माना जाता है. बारिश के मौसम में मिट्टी में प्राकृतिक नमी होती है, जिससे पौधा जल्दी जम जाता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है, ताकि पेड़ फैलकर बढ़ सके और आगे चलकर फल अच्छी मात्रा में दे. एक बार पौधा जम जाए, तो उसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं रहती.

देखभाल में नहीं लगता ज्यादा खर्च

शुरुआती एक-दो साल तक पौधों को थोड़ा ध्यान देना पड़ता है, जैसे समय-समय पर सिंचाई और हल्की खाद. इसके बाद इमली का पेड़ लगभग आत्मनिर्भर हो जाता है. यह सूखे में भी जिंदा रह सकता है और कम पानी में भी फल देता है. कीट और रोग भी इसमें कम लगते हैं, जिससे दवाओं पर खर्च बहुत कम आता है.

कब शुरू होती है कमाई

इमली के पेड़ आमतौर पर तीसरे या चौथे साल से फल देना शुरू कर देते हैं. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होता है, फल की मात्रा भी बढ़ती जाती है. एक परिपक्व पेड़ से हर साल अच्छी मात्रा में इमली मिल सकती है, जिसे किसान ताजा या सुखाकर बाजार में बेच सकते हैं. सही बाजार मिलने पर एक पेड़ से ही अच्छी-खासी आमदनी हो सकती है.

लंबे समय तक सुरक्षित आमदनी

इमली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक फल देने वाला पेड़ है. एक बार बागान तैयार हो जाए, तो सालों तक नियमित आमदनी मिलती रहती है. यही वजह है कि आज कई किसान इमली की खेती को भविष्य की सुरक्षित कमाई मानकर अपना रहे हैं.

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

कम लागत, कम जोखिम और बढ़ती बाजार मांग के चलते इमली की खेती किसानों के लिए एक सुनहरा मौका बन चुकी है. खासकर वे किसान, जिनके पास बंजर या कम उपज वाली जमीन है, उनके लिए यह पेड़ वरदान साबित हो सकता है. सही जानकारी, थोड़ी सी मेहनत और धैर्य के साथ इमली की खेती किसानों को लाखों की कमाई तक पहुंचा सकती है.

Topics: