23 अप्रैल से यूपी में शुरू होगा बासमती बीज मेला, पहले आओ-पहले पाओ पर मिलेंगी 8 उन्नत किस्में

बीजों का वितरण “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा. यानी जो किसान पहले पहुंचेंगे, उन्हें अपनी पसंद की किस्म के बीज मिलने की संभावना ज्यादा होगी. क्योंकि बीजों की संख्या सीमित हो सकती है, इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय पर मेले में पहुंचें, ताकि इस अवसर का पूरा लाभ उठा सकें.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 Apr, 2026 | 12:57 PM

UP basmati seed fair: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खेती को और बेहतर बनाने का एक अच्छा मौका सामने आया है. मेरठ जिले के मोदीपुरम में 23 अप्रैल को बासमती बीज मेला आयोजित किया जा रहा है, जहां किसानों को धान की उन्नत और प्रमाणित किस्मों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. यह मेला खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो बासमती धान की खेती करते हैं या करना चाहते हैं.

मेरठ में क्यों खास है यह बीज मेला

यह आयोजन किसानों को सीधे अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है. अक्सर देखा जाता है कि किसानों को बाजार में नकली या कम गुणवत्ता वाले बीज मिल जाते हैं, जिससे उनकी फसल प्रभावित होती है. ऐसे में इस तरह का मेला किसानों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनता है, जहां उन्हें प्रमाणित बीज मिलते हैं.

आठ उन्नत किस्मों के बीज होंगे उपलब्ध

इस बीज मेले में किसानों को बासमती धान की कुल आठ उन्नत किस्मों के बीज दिए जाएंगे. इनमें पूसा बासमती 1121, 1885, 1718, 1509, 1692, पूसा बासमती 1, 1401 और 1847 शामिल हैं.

ये सभी किस्में अपनी बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं. इनमें लंबे और पतले दाने, अच्छी खुशबू और बाजार में ऊंची कीमत मिलने जैसी खूबियां होती हैं. यही कारण है कि बासमती चावल की देश और विदेश दोनों जगह काफी मांग रहती है.

पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर वितरण

बीजों का वितरण “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा. यानी जो किसान पहले पहुंचेंगे, उन्हें अपनी पसंद की किस्म के बीज मिलने की संभावना ज्यादा होगी. क्योंकि बीजों की संख्या सीमित हो सकती है, इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय पर मेले में पहुंचें, ताकि इस अवसर का पूरा लाभ उठा सकें.

किस्मों की खासियत समझना जरूरी

बासमती की कुछ किस्में जैसे पूसा बासमती 1121 अपने लंबे दाने और शानदार खुशबू के लिए मशहूर हैं. वहीं 1509 और 1718 जैसी किस्में जल्दी पकने वाली होती हैं, जिससे किसान कम समय में फसल तैयार कर सकते हैं. कुछ किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता भी होती है, जिससे किसानों का दवा पर खर्च कम होता है और मुनाफा बढ़ता है.

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान अच्छी और प्रमाणित किस्मों के बीजों का इस्तेमाल करें, तो उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता भी बेहतर होती है. बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसानों को बेहतर दाम मिल सकता है. इससे उनकी आमदनी में सीधा फायदा देखने को मिलता है.

आधुनिक खेती की ओर बढ़ता कदम

इस तरह के बीज मेले सिर्फ बीज वितरण तक सीमित नहीं होते, बल्कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों के बारे में भी जानकारी देते हैं. इससे किसान आधुनिक खेती की ओर बढ़ते हैं और अपनी खेती को ज्यादा लाभदायक बना सकते हैं.

किसानों के लिए जरूरी तैयारी

मेले में जाने से पहले किसानों को अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड आदि साथ रखने की सलाह दी गई है. साथ ही समय और स्थान की जानकारी पहले से लेना भी जरूरी है, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो.

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