देश में पानी का बड़ा संकट! दक्षिण भारत के बांध खाली होने की कगार पर, 25 फीसदी से भी कम पानी बचा

मौसम विभाग पहले ही इस साल सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की आशंका जता चुका है. इसके साथ ही दुनिया की कई मौसम एजेंसियों ने एल नीनो के सक्रिय होने की चेतावनी भी दी है. कुछ एजेंसियों ने तो सुपर अल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई है. अल नीनो की वजह से बारिश कम हो सकती है, जिससे दालें, तिलहन और मोटे अनाज जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 May, 2026 | 07:45 AM

India water crisis: देश में भीषण गर्मी के बीच अब पानी का संकट भी गहराने लगा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है. स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि देश के तीन प्रमुख जलाशय क्षेत्रों में से दो में जल भंडारण क्षमता 40 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच चुकी है. वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह स्तर 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 166 बड़े बांधों की कुल जल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है, लेकिन फिलहाल इनमें केवल 60.830 BCM पानी बचा है. यानी कुल क्षमता का सिर्फ 33 प्रतिशत पानी ही मौजूद है.

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चिंता

सबसे ज्यादा खराब हालात दक्षिण भारत में दिखाई दे रहे हैं. यहां के 47 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर केवल 24 प्रतिशत के आसपास रह गया है. खासकर कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहां जलाशयों की क्षमता 20 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गई है.

आंध्र प्रदेश में जल स्तर करीब 35 प्रतिशत और तमिलनाडु में 33 प्रतिशत दर्ज किया गया है. वहीं केरल में भी जलाशयों में सिर्फ 22 प्रतिशत पानी बचा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन राज्यों में खरीफ फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

कमजोर मानसून और एल नीनो ने बढ़ाई टेंशन

मौसम विभाग पहले ही इस साल सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की आशंका जता चुका है. इसके साथ ही दुनिया की कई मौसम एजेंसियों ने अल नीनो के सक्रिय होने की चेतावनी भी दी है. कुछ एजेंसियों ने तो सुपर अल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई है.

अल नीनो की वजह से बारिश कम हो सकती है, जिससे दालें, तिलहन और मोटे अनाज जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं. खेती पर निर्भर राज्यों में इसका असर किसानों की आय और खाद्य उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है.

कई राज्यों में बारिश की भारी कमी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 1 मार्च से 20 मई के बीच देश के करीब 29 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई. जनवरी और फरवरी में तो देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्सों में या तो बहुत कम बारिश हुई या बिल्कुल बारिश नहीं हुई. बारिश की कमी का असर अब जलाशयों में साफ दिखाई देने लगा है. कई राज्यों में पानी की उपलब्धता तेजी से घट रही है.

पूर्वी और पश्चिमी भारत में भी चिंता

पूर्वी भारत के 27 जलाशयों में जल स्तर घटकर केवल 27.5 प्रतिशत रह गया है. पश्चिम बंगाल में स्थिति और खराब है, जहां जलाशयों में सिर्फ 12.7 प्रतिशत पानी बचा है. पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में पानी का स्तर 37 प्रतिशत तक पहुंच गया है. गोवा के एकमात्र बड़े जलाशय में केवल 30 प्रतिशत पानी बचा है.

पंजाब में बेहतर स्थिति, उत्तर भारत को राहत

उत्तर भारत के 11 जलाशयों में कुल क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत पानी मौजूद है. पंजाब में जल स्तर सबसे बेहतर माना जा रहा है, जहां जलाशय 64 प्रतिशत तक भरे हुए हैं. राजस्थान में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में 33 प्रतिशत दर्ज किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत को नहरों के जरिए सिंचाई सुविधा मिलने के कारण यहां स्थिति अभी उतनी गंभीर नहीं है.

किसानों और शहरों पर पड़ सकता है असर

अगर आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई राज्यों में पेयजल संकट और खेती दोनों प्रभावित हो सकते हैं. खासकर खरीफ सीजन में पानी की कमी फसलों की बुवाई पर असर डाल सकती है.

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